आप सभी को नमस्कार। कोरोना वायरस का नाम मैंने पहली बार सुना। मन में तब बहुत सारी बातें भी आईं। पहले तो मुझे लगा कि होगी कोई सामान्य बीमारी, जो ठीक हो जाएगी। बाद में पता चला कि इसका कोई इलाज नहीं, दवा नहीं। टीवी और अखबार में जब यह पढ़ने लगा कि इससे तो लोग मर रहे हैं, तब लगा कि यह कोई खतरनाक बीमारी है। जब स्कूल बंद हुआ तो मैं तो बहुत खुश हुआ। सोचा चलो छुट्टी मिल गई, स्कूल नहीं जाना पड़ेगा। घर पर मम्मी पापा के साथ पहली बार इतना समय मिला। छुट्टी जब लंबी चली तो पढ़ाई को लेकर चिता हुई, लेकिन बाद में स्कूल से आनलाइन पढ़ाई का मैसेज आने लगा। जिन दोस्तों से दूर हो गया था, आनलाइन कक्षा में उनसे बात करने को मिला। पहले तो आनलाइन पढ़ाई बहुत अच्छी लगती थी। बाद में आनलाइन पढ़ाई बोझिल लगने लगी। कोरोना के चलते पहली बार बाहर जाने से लेकर किसी से मिलने पर भी डर लगता था। हां, एक बात और मैंने महसूस की है। बहुत से लोग जो साफ - सफाई को लेकर बहुत अधिक ध्यान नहीं देते थे। अब सभी लोग स्वच्छता को लेकर सोच रहे हैं। इस बीमारी से हमें पता चला कि स्वच्छता का हमारे जीवन में कितना महत्व है। अब मैं बाहर कुछ भी खाने से पहले यह भी देखता हूं कि वहां साफ-सफाई कैसी है। पहले हम बाहर से फास्ट फूड की डिमांड करते थे, अब घर के खाने का महत्व भी समझ में आने लगा है। अब दशहरा आने वाला है फिर दीपावली आएगी। ऐसे में मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूं कि सब कुछ अब पहले जैसा हो जाए। और हम सब को इस भयंकर बीमारी से मुक्ति मिल जाए। किसी से मिलने-जुलने से ऐसी बीमारी फैलने का डर खत्म हो जाए। सब लोग मिलजुल कर त्योहार बना सकें। प्रभाव शर्मा

कक्षा- 7वीं, सेंट पेट्रिक्स स्कूल

इंडियन टी20 लीग

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