राइस या विक्टर, जैक या फिर राउडी ही क्यों न हों... सैन्य अभ्यास में अमेरिकी स्नाइपर संग बखूबी कर रहे कदमताल
भारतीय सेना के प्रशिक्षित फौजी श्वान 'युद्ध अभ्यास-2026' में अमेरिकी सैनिकों के साथ अपनी विशेष क्षमताओं का प्रदर्शन कर रहे ...और पढ़ें

युद्ध अभ्यास में भारतीय रोबोटिक सैन्य श्वानों की खूबियों को देखते दोनों सेनाओं के सैनिक। सौ. सेना
HighLights
भारतीय सेना के प्रशिक्षित श्वान 'युद्ध अभ्यास-2026' में शामिल।
अमेरिकी सैनिकों संग ट्रैकिंग, विस्फोटक पहचान क्षमता साझा की।
राइस, विक्टर, जैक, राउडी ने विशेष दक्षता का प्रदर्शन किया।
जागरण संवाददाता, मेरठ। भारत-अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास-2026’ में भारतीय सेना के प्रशिक्षित फौजी श्वान केवल अपनी फुर्ती और साहस का प्रदर्शन ही नहीं कर रहे, बल्कि आतंकवाद-रोधी अभियानों में इस्तेमाल होने वाली ट्रैकिंग, विस्फोटक पहचान, भवन की तलाशी और त्वरित कार्रवाई जैसी क्षमताओं की बारीकियां भी अमेरिकी सैनिकों के साथ साझा कर रहे हैं।
औली के ऊंचाई वाले दुर्गम और ठंडे सामरिक वातावरण में आयोजित अभ्यास के दौरान 16 सितंबर को शुरू हुए आतंकवाद-रोधी भवन तलाशी प्रदर्शन में भारतीय सेना के स्नाइपर, केनाइन और रोबोटिक डाग ने हिस्सा लिया। इस दौरान अमेरिकी सैनिकों ने भारतीय जवानों और उनके उपकरणों की कार्यप्रणाली को करीब से देखा और समझा। इसी क्रम में आरवीसी सेंटर एंड कालेज में जन्मे और प्रशिक्षित राइस, विक्टर, जैक और राउडी ने अपनी विशेष परिचालन दक्षता का प्रदर्शन कर संयुक्त प्रशिक्षण को और प्रभावी बनाया।
भवन की तलाशी से लेकर विस्फोटक पहचान तक
युद्ध अभ्यास के फील्ड ट्रेनिंग एक्सरसाइज चरण में दोनों देशों के सैनिक काउंटर आइईडी, काउंटर यूएएस, स्नाइपर आपरेशन, पर्वतीय युद्ध और अत्यधिक ठंडे मौसम में युद्ध संचालन का प्रशिक्षण ले रहे हैं। भवन तलाशी के प्रदर्शन का उद्देश्य केवल एक आपरेशन का अभ्यास करना नहीं, बल्कि दोनों सेनाओं के बीच टैक्टिक्स, तकनीक और प्रक्रियाओं के प्रत्यक्ष आदान-प्रदान को मजबूत करना भी है। आगामी चरण में अमेरिकी और भारतीय पैदल सेना की टुकड़ियां एक ही बटालियन संरचना के भीतर साथ काम करेंगी। ऐसे में शुरुआती प्रशिक्षण के दौरान विकसित साझा प्रक्रियाएं और आपसी भरोसा संयुक्त अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
चारों श्वानों की अलग-अलग विशेषज्ञता
इस अभ्यास में शामिल विक्टर और राउडी रामपुर हाउंड, जैक बेल्जियन मेलिनोइस और राइस लैब्राडोर रिट्रीवर हैं। संदिग्ध की तलाश, गंध के आधार पर ट्रैकिंग, विस्फोटक की पहचान, भवन में प्रवेश और असाल्ट जैसी परिस्थितियों में इनकी भूमिका दिखाई गई। कठिन पहाड़ी क्षेत्र में इन श्वानों का प्रशिक्षण भारतीय सेना की केनाइन क्षमता की उपयोगिता को भी सामने लाता है। युद्ध अभ्यास-2026 अमेरिका-प्रायोजित द्विपक्षीय अभ्यास का 22वां संस्करण है, जिसका समापन 28 सितंबर को प्रस्तावित है। अभ्यास के दौरान इस तरह के प्रदर्शन दोनों सेनाओं को वास्तविक अभियान जैसी परिस्थितियों में एक-दूसरे की कार्यप्रणाली समझने और संयुक्त संचालन के लिए आवश्यक सामंजस्य विकसित करने का अवसर दे रहे हैं।
हैंडलर और श्वान का तालमेल सबसे अहम
सैन्य श्वान की सफलता केवल उसके प्रशिक्षण पर निर्भर नहीं करती। अभियान के दौरान श्वान और उसके हैंडलर के बीच भरोसा, संकेतों की समझ और त्वरित समन्वय बेहद महत्वपूर्ण होता है। युद्ध अभ्यास में रूम इंटरवेंशन, रैपलिंग और अन्य सामरिक गतिविधियों के दौरान यही तालमेल देखने को मिल रहा है। भारतीय सेना के फौजी श्वान ने इससे पहले भी विभिन्न सीमावर्ती क्षेत्रों और सैन्य अभ्यासों में अपनी उपयोगिता साबित की है। युद्ध अभ्यास-2026 में इन चारों श्वानों की भागीदारी अमेरिकी सैनिकों को भारतीय सेना की ट्रैकिंग, विस्फोटक पहचान और असाल्ट केनाइन क्षमताओं को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर दे रही है। साथ ही दोनों सेनाओं के केनाइन हैंडलरों के बीच प्रशिक्षण तकनीक और परिचालन अनुभवों का आदान-प्रदान भी हो रहा है।
राउडी ने किया दृढ़ता और क्षमता का प्रदर्शन
भारतीय सेना का श्वान ‘राउडी’ रामपुर हाउंड नस्ल का है। वह अमेरिकी सेना के जवानों के साथ भारतीय सेना के श्वानों की फुर्ती, सहनशक्ति और परिचालन क्षमता का प्रदर्शन कर रहा है। युद्ध अभ्यास में भाग लेने से पहले राउडी ने विभिन्न सैन्य अभ्यासों और परिचालन तैनातियों में हिस्सा लिया है। इनमें उत्तरी और पूर्वी सीमाओं पर तैनाती भी शामिल है। इन क्षेत्रों में भारतीय सेना के श्वान सैनिकों की सुरक्षा और परिचालन प्रभावशीलता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
राउडी ने मेघालय में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास में भी भाग लिया है। इससे उसे बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण वातावरण में भारतीय सेना के श्वानों की क्षमताओं का प्रदर्शन करने का अवसर मिला। युद्ध अभ्यास के दौरान राउडी एक बार फिर अपने विशेष कौशल और कार्य क्षमता का प्रदर्शन कर रहा है। उसका प्रदर्शन अमेरिकी सैन्य दल को परिचालन तैनाती के दौरान भारतीय सेना के श्वानों की विभिन्न भूमिकाओं, सुरक्षा, पहचान और युद्धक्षेत्र में सहयोग, को करीब से समझने का अवसर दे रहा है।

विक्टर में किया विस्फोटक पहचान क्षमता का प्रदर्शन
भारतीय सेना का विशेष रूप से प्रशिक्षित विस्फोटक पहचान फौजी श्वान ‘विक्टर’ वर्तमान में युद्ध अभ्यास में भाग ले रहा है। वह अमेरिकी सेना के जवानों के साथ अपनी विशेष विस्फोटक पहचान क्षमता का प्रदर्शन कर रहा है। विक्टर इससे पहले विभिन्न सैन्य अभ्यासों और परिचालन तैनातियों में हिस्सा ले चुका है और अलग-अलग परिचालन परिस्थितियों में महत्वपूर्ण अनुभव हासिल कर चुका है।
उत्तर-पूर्वी सीमा पर तैनाती के दौरान विक्टर और उसके हैंडलर ने तलाशी अभियान अभ्यास चलाए और आइईडी की पहचान की। इससे कठिन भूभाग में छिपे विस्फोटक खतरों का पता लगाने और सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में प्रशिक्षित सेना के फौजी श्वानों की उपयोगिता सामने आई। युद्ध अभ्यास में विक्टर एक बार फिर अपने विशेष कौशल, सटीकता और प्रशिक्षण का प्रदर्शन कर रहा है। उसके प्रदर्शन से अमेरिकी सैन्य दल को भारतीय सेना के विस्फोटक पहचान कैनाइन के इस्तेमाल और परिचालन तैनाती के दौरान उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिल रहा है।
असाल्ट फौजी श्वान ‘जैक’ ने किया फुर्ती और साहस का प्रदर्शन
भारतीय सेना का असाल्ट फौजी श्वान ‘जैक’ अपनी फुर्ती, बुद्धिमत्ता और परिचालन क्षमता के लिए जाना जाता है। वह वर्तमान युद्ध अभ्यास में अमेरिकी सेना के जवानों के साथ अपनी विशेष असाल्ट क्षमता का प्रदर्शन कर रहा है। जैक इससे पहले उत्तरी और पूर्वी सीमाओं पर तैनात रह चुका है, जहां उसने चुनौतीपूर्ण और विविध भूभाग में सौंपे गए परिचालन कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया। उसके परिचालन अनुभव ने कठिन परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से कार्य करने की उसकी क्षमता को मजबूत किया है।
युद्ध अभ्यास के दौरान जैक अपने असाल्ट कौशल और भारतीय सेना के फौजी श्वानों को दिए जाने वाले उच्च स्तर के प्रशिक्षण का प्रदर्शन कर रहा है। उसकी भागीदारी से अमेरिकी सैन्य दल को सामरिक अभियानों में भारतीय सेना के असाल्ट सैन्य श्वानों के इस्तेमाल और क्षमताओं को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिल रहा है। अभ्यास में जैक का प्रदर्शन भारतीय सेना के सैन्य श्वानों की फुर्ती, साहस, अनुशासन और बहुआयामी परिचालन क्षमता को दर्शाता है। साथ ही संयुक्त प्रशिक्षण के माध्यम से भारतीय और अमेरिकी सेनाओं के बीच पेशेवर ज्ञान और श्वान-प्रबंधन से जुड़ी प्रशिक्षण पद्धतियों का आदान-प्रदान भी हो रहा है।

ट्रैकर श्वान ‘राइस’ है खुशबू के आधार पर तलाश में माहिर
भारतीय सेना का युवा और अत्यंत सक्रिय ट्रैकर फौजी श्वान ‘राइस’ वर्तमान युद्ध अभ्यास में अमेरिकी सेना के जवानों के साथ अपनी विशेष ट्रैकिंग क्षमता का प्रदर्शन कर रहा है। राइस भारतीय सेना के अत्यंत सक्षम ट्रैकर सैन्य श्वानों में शामिल है। उसे मानव से वस्तु और वस्तु से मानव की ट्रैकिंग के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है। इन क्षमताओं के माध्यम से वह परिचालन परिस्थितियों में मानव की गंध के निशान और किसी व्यक्ति से जुड़ी वस्तुओं के आधार पर उसकी तलाश और पीछा करने में सैनिकों की सहायता कर सकता है।
युद्ध अभ्यास के दौरान राइस अमेरिकी सैन्य दल के सामने अपनी ट्रैकिंग क्षमता का प्रदर्शन कर रहा है। इससे अमेरिकी सैनिकों को सैन्य अभियानों के दौरान भारतीय सेना के ट्रैकर श्वान की विशेष भूमिका को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिल रहा है। राइस की भागीदारी भारतीय सेना के सैन्य श्वान को दिए जाने वाले पेशेवर प्रशिक्षण, विशेष क्षमताओं और परिचालन उपयोगिता को दर्शाती है। साथ ही यह अभ्यास भारतीय और अमेरिकी सेनाओं के बीच विशेषज्ञता साझा करने और श्वान-प्रबंधन की प्रशिक्षण पद्धतियों को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध करा रहा है।
