मेरठ, जेएनएन। 15 अगस्त, 1947 का वो दिन, जब दिल्ली से आजादी का ऐलान हुआ तो मेरठ में हर तरफ जश्न का माहौल रहा। शहर के हर मोहल्ले में तिरंगा फहराया, लोगों के चेहरे पर आजाद भारत में सांस लेने का आत्मविश्वास भी दिखा। बच्चे व बड़े सभी आजादी का जश्न मना रहे थे।

आजादी की लड़ाई

आजादी की लड़ाई में गवाह रहे गांधी आश्रम पर लोग सबसे पहले एकत्रित हुए थे। इसके बाद पीएल शर्मा स्मारक में शाम को कार्यक्रम हुआ। देर शाम तक लोग देशभक्ति के गीत गाते रहे। इतिहासकार डा. केके शर्मा बताते हैं कि आजादी की इस सुबह का गवाह बनने के लिए बहुत से लोग मेरठ से दिल्ली भी गए थे। मेरठ में सड़कों पर भारत माता के जयकारे और वंदेमातरम के गीत गूंजते रहे। लोगों ने झांकियां और जुलूस निकाले।

बंटवारे का गम भी था

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमरनाथ गुप्ता बताते हैं कि 15 अगस्त, 1947 के दिन शहर में खुशी तो थी, लेकिन यह खुशी अधूरी थी। बहुत से लोग भारत-पाक बंटवारे और हिंदुओं के कत्लेआम को नहीं भूल पाए थे, उनके चेहरे पर इसका दर्द भी था।

बच्चों के चित्रों में दिखी आजादी की कहानी

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को दैनिक जागरण की ओर से ऑनलाइन चित्रकला प्रतियोगिता हुई, जिसमें दस से पंद्रह साल तक के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने स्वतंत्रता दिवस थीम पर सुंदर चित्र बनाकर रंग भरे। इसमें सोफिया गल्र्स स्कूल, बीडीएस इंटरनेशनल स्कूल, केएल इंटरनेशनल स्कूल, द अध्ययन स्कूल, दयावती मोदी एकेडमी और एमपीएस कैंट के हजारों छात्र-छात्राओं ने देशभक्ति थीम पर चित्र बनाए। सर्वश्रेष्ठ चित्रों का चयन कनोहर लाल पीजी कॉलेज की प्राचार्य डा. किरन प्रदीप ने किया।

ये रहे विजेता

प्रतियोगिता में एमपीजीएस कैंट सातवीं कक्षा की अक्षरा चौहान प्रथम, बीडीएस इंटरनेशन स्कूल छठीं कक्षा की अनन्या दूसरे और बीडीएस इंटरनेशनल स्कूल सातवीं कक्षा की अर्पिता तीसरे स्थान पर रहीं। वहीं एमपीजीएस कैंट नौवीं कक्षा की अग्रिमा मिश्रा और सोफिया गल्र्स स्कूल 11वीं कक्षा की वाणी सोंधी ने सांत्वना पुरस्कार जीता।

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