मेरठ, जेएनएन। कोरोना के संक्रमण के चलते अचानक उच्च शिक्षा के सामने एक बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई है। ऐसे दौर में जो शिक्षण संस्थाएं जितनी जल्द ऑनलाइन होंगी, उससे शिक्षा को कम नुकसान होगा। ये बातें वक्ताओं ने कहीं। मौका था एनएएस डिग्री कॉलेज में 'वैश्विक महामारी के दौर में उच्च शिक्षा : मुद्दे,चुनौतियां और संभावना विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का।

रविवार को दूसरे दिन उच्च शिक्षा निदेशक क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. राजीव गुप्ता ने कहा कि इस समय कालेजों को अच्छे कंटेंट बनाने चाहिए, ताकि छात्र-छात्राएं इसका लाभ उठा सकें। शिक्षक यूट््यूब का भी प्रयोग कर सकते हैं। राजस्थान विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र विभाग के भूतपूर्व अध्यक्ष प्रो. राजीव ने कहा कि इस महामारी ने हमारी शिक्षा व्यवस्था की संरचनात्मक कमियों को उजागर किया है। इग्नू के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अमित चतुर्वेदी ने कहा कि शिक्षा में सूचना और संचार तकनीक आगे भी बनी रहेगी। यूट््यूब लेक्चर और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भूमिका में बढ़ोतरी होगी।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. आशीष सक्सेना ने कहा कि नई तकनीक को जमीनी स्तर पर सहायक बनाना होगा। प्रकाशन विभाग के भूतपूर्व डायरेक्टर डॉ. श्याम सिंह शशि ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दी जाने वाली शिक्षा हमारी परंपरागत क्लास रूम पर आधारित शिक्षा का विकल्प नहीं बन सकती। कनाडा के प्रो. जेवियर फर्नांडो ने कहा कि ऑनलाइन लेक्चर और ट््यूटोरियल महत्वपूर्ण तो है, परंतु लैब का कार्य नहीं कर सकता। जर्मनी के प्रो. एंड्रयू ने कहा कि शैक्षणिक संस्थाएं जितनी जल्दी ऑनलाइन होंगी उतना ही शिक्षा का कम नुकसान होगा। समापन सत्र की अध्यक्षता प्रबंध समिति के सचिव राजेंद्र शर्मा ने की। प्रबंध समिति के सदस्य पंकज शर्मा, अमित शर्मा भी उपस्थित रहे । प्राचार्य डॉ. वीपी राकेश ने धन्यवाद किया। संयोजक डॉ. संजीव महाजन रहे। 

इंडियन टी20 लीग

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस