मेरठ, जेएनएन। पुलिस की टीम जांच कर रही है कि 71 हजार लीटर मिट्टी के तेल का अवैध स्टॉक क्यों रखा गया था? पड़ताल की जा रही है कि कालाबाजारी या मिलावट किस के लिए मिट्टी का तेल रखा गया था। पुलिस ने फर्म स्वामी से स्टॉक के पुराने रिकार्ड की जानकारी मांगी है। हालांकि अभी तक स्टाफ ने उनका तबीयत खराब होना बताया है। पुलिस देख रही है कि तेल टैंक में कब से स्टॉक हो रहा था। या हमेशा ही इतना स्टॉक रहता था।

सप्लाई रजिस्टर भी खंगाला
गोदाम से तेल का सप्लाई रजिस्टर भी खंगाला जा रहा है। पुलिस ने जिस प्रकार से मुकदमा दर्ज करने के बाद तेजी से विवेचना शुरू कर दी है, उससे लग रहा है कि मेरठ में तेल के खेल पर शासन पूरी तरह से गंभीर है। तेल की कालाबाजारी करने वालों पर भी कड़ा शिकंजा कसने जा रहा है। माना जा रहा है कि उक्त मुकदमे में जल्द ही और भी धारा की बढ़ोतरी की जाएगी।

पुलिस ने किया क्राइमसीन का निरीक्षण
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने विवचेना शुरू कर दी है। इंस्पेक्टर आनंद मिश्र टीम के साथ गोदाम पर पहुंचे। क्राइमसीन का निरीक्षण किया गया। पुलिस ने क्राइमसीन का नक्शा तैयार किया गया है। साथ ही आसपास के लोगों से भी पूछताछ की गई है।

नामचीन कारोबारी संजय का है डिपो
यह डिपो पेट्रोल-डीजल और केरोसिन के नामचीन व्यापारी संजय कुमार का है। बताया जाता है कि संजय कुमार के शहर में कई पेट्रोल पंप भी हैं। मिट्टी तेल की डीलरशिप भी उनके पास है। साथ ही शिक्षण संस्थान का संचालन भी करते है। उनका सियासत और ब्यूरोक्रेसी में बड़ा रसूख है।

दिया जाएगा नोटिस
मैसर्स रतिराम खूबचंद को सोमवार को इंडियन ऑयल की ओर से कारण बताओ नोटिस दिया जाएगा। कोटा से अधिक तेल मिलने के कारण यह नोटिस दिया जाएगा। कोटा से अधिक केरोसिन रखने की वजह साबित न कर पाने पर लाइसेंस रद कर दिया जाएगा। इंडियन ऑयल के एरिया सेल्स मैनेजर मोहित कुमार ने बताया कि यहां पर 71 हजार 888 लीटर केरोसिन अतिरिक्त पाया गया है। इसलिए कारण बताओ नोटिस दिया जाएगा।

लिए गए थे नमूने
मौके पर लगाए गए नोटिस बोर्ड के अनुसार रतिराम खूबचंद डिस्ट्रीब्यूटर का मासिक कोटा 230 किलो लीटर और भंडारण क्षमता 280 किलो लीटर दर्ज है। वहां पर चार टैंक हैं। कहा कि पहले जो मिलावट का प्रकरण पकड़ में आया था वह पेट्रोल पंप पर नहीं अलग स्थान पर पकड़ा गया था। पेट्रोल पंपों पर शक के आधार पर सील लगाने के बाद नमूने लिए गए थे। जब नमूने में मिलावट मिलेगी तभी इंडियन ऑयल की ओर से उस पर कार्रवाई हो सकती है। रही बात केरोसिन डिपो की तो इंडियन ऑयल इस डिपो को कोटा के अनुसार केरोसिन देता है उसके बाद उसका क्या होता है यह पूर्ति विभाग से संबंधित प्रकरण है।

यह होते हैं केरोसिन डिपो
राशन डीलरों के पास केरोसिन इन्हीं डिपो से पहुंचता है। एक सरकारी प्रक्रिया के तहत प्राइवेट लोगों को केरोसिन डिपो तैयार करने का लाइसेंस मिलता है। सभी को अलग-अलग कोटे का लाइसेंस मिलता है। उसी के अनुसार वे टैंक बनाते हैं। डिपो को जितना कोटा मिलता है उतना ही तेल वहां रखा जा सकता है। केरोसिन डिपो सभी पेट्रोलियम कंपनियों के होते हैं। जिस पेट्रोलियम कंपनी से संबंधित डिस्ट्रीब्यूटरशिप मिलती है, उसी पेट्रोलियम कंपनी के रिफाइनरी से केरोसिन यहां पर आता है।

रतिराम खूबचंद के टैंक की होगी खोदाई
मैसर्स रतिराम खूबचंद के केरोसिन टैंक में 71, 888 लीटर से ज्यादा तेल तो नहीं है? या फिर उसमें कुछ और है? इसकी पड़ताल के लिए इंडियन ऑयल कंपनी उनके टैंकों की खोदाई करेगी। कंपनी के सेल्स मैनेजर मोहित कुमार ने बताया कि अभी इस संबंध में लिखित निर्देश नहीं मिला है। प्रशासन व पुलिस की ओर से आदेश मिलते ही कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। यह प्रकरण एडीएम सिटी के निर्देशन में चल रहा है।

अब रतिराम डिपो से राशन डीलर्स को नहीं मिलेगा तेल
मैसर्स रतिराम खूबचंद डिपो से मेरठ शहर के सभी राशन डीलर, मवाना व सरधना से संबंधित डीलर मिट्टी का तेल ले जाते थे। छापेमारी प्रकरण के बाद यहां से राशन डीलरांे को आपूर्ति रोक दी जाएगी। छोटे-बड़े डिपो मिलाकर जिले में कुल 10 केरोसिन डिपो हैं, जो डीलर इनसे तेल लेते थे, उन्हें अन्य डिपो से संबद्ध किया जाएगा।

लाल डायरी में दफन हैं तेल के खेल के कई राज
पारस केमिकल में छापामारी के दौरान पुलिस को एक लाल डायरी मिली थी, जिसे परतापुर थाने में रखा गया था। रविवार को आइजी आलोक सिंह ने उक्त लाल डायरी की तलाश कराई गई। क्राइम ब्रांच की टीम लाल डायरी लेने के लिए देर रात परतापुर थाने में गई थी। घंटों की मशक्कत के बाद तत्कालीन इंस्पेक्टर सुभाष अत्री के पास से लाल डायरी बरामद हुई है।

पुलिसकर्मियों के भी नाम
लाल डायरी में कई पुलिसकर्मियों का नाम प्रमुखता से मिला है। डायरी में प्रशासन व मीडिया से जुड़े कुछ नाम भी होने की बात कही जा रही है। आइजी उक्त पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई कराने जा रहे है। इस डायरी में नाम होने को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं। कहीं काले कारोबार को चलाने के लिए सुविधा शुल्क का हिसाब तो इस डायरी में नहीं है। 

Posted By: Prem Bhatt

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