नवनीत शर्मा, मेरठ

एचआइवी का खौफ मां-बाप पर भी इस कदर हावी हुआ कि उन्होंने अपने जिगर के टुकड़े को ही खुद से दूर कर दिया। एड्स से पीड़ित बच्चों को मरने के लिए अभिभावक सड़क पर छोड़कर भाग गए। ऐसे ही बदनसीब डेढ़ दर्जन बच्चों का आशियाना मेरठ में बना है। मवाना रोड पर रक्षापुरम स्थित सत्यकाम केयर होम में रह रहे ऐसे बच्चे अब बेहतर उपचार पाने के साथ शिक्षा भी प्राप्त कर रहे हैं।

रक्षापुरम में कुछ साल पहले शुरू हुआ सत्यकाम केयर होम ठुकराए गए एचआइवी पीड़ित बच्चों के लिए नया घर है। जिला प्रशासन की निगरानी में संचालित इस केयर होम में डेढ़ दर्जन बच्चे अपने भविष्य के सपने संजो रहे हैं। केयर होम के संचालक अजय शर्मा बताते हैं कि परिजनों द्वारा त्याग दिए गए बच्चे इस केयर होम में जिला बाल कल्याण समिति के माध्यम से आते हैं और यहीं पर रहकर अच्छा उपचार पाने के साथ शिक्षा भी प्राप्त करते हैं। बीमारी से पीड़ित बच्चों का मेडिकल कालेज के साथ दिल्ली के अस्पताल से भी उपचार कराया जा रहा है। केस 1

उन्नाव में चार वर्षीय बच्चा बस स्टैंड पर लावारिश हालात में मिला। बाल कल्याण समिति ने बच्चे को अपने संरक्षण में लेकर उसके अभिभावकों का पता लगाने का प्रयास किया, लेकिन पता नहीं चल सका। मेडिकल जांच कराई गई तो बच्चा एचआइवी पॉजिटिव था। बाद में बच्चे को मेरठ केयर होम भेज दिया गया। केस 2

फीरोजाबाद में भी छह वर्ष का एक बच्चा ऐसे ही सड़क पर घूमता मिला, बच्चे ने खुद को बिहार का निवासी और पिता द्वारा छोड़कर जाना बताया। काफी प्रयास के बाद भी बच्चे को अपनाने के लिए अभिभावक सामने नहीं आ सके। बाद में इस बच्चे को भी मेरठ भेज दिया गया। केस 3

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दो शहरों के निवासी अभिभावक ही बीमारी से पीड़ित बच्चों को केयर होम में छोड़ गए। अब बच्चे यहीं रहकर उपचार के साथ पढ़ाई भी कर रहे हैं। कभी-कभी अभिभावक फोन पर बच्चों के बारे में जानकारी प्राप्त कर लेते हैं। प्रदेश में इकलौता केयर होम

रक्षापुरम स्थित सत्यकाम केयर होम कई मामलों में खास है। प्रदेश का इकलौता ऐसा केयर होम है, जहां एचआइवी पॉजिटिव बच्चों को रखने, उपचार आदि की निश्शुल्क व्यवस्था है। हर सप्ताह में एक बार प्रोबेशन विभाग की टीम केयर होम का निरीक्षण भी करती है और रिपोर्ट शासन को भेजी जाती है। इन्होंने कहा--

सत्यकाम केयर होम में करीब डेढ़ दर्जन बच्चे हैं, सभी का उपचार मेरठ के साथ दिल्ली से भी चल रहा है। शहर के कई चिकित्सक भी मदद करते हैं। यहां रहने वाले बच्चों को अपने मां-बाप का नाम तक नहीं पता है।

-अजय शर्मा, केयर होम संचालक रक्षापुरम स्थित केयर होम में रह रहे बच्चों को उनके अभिभावकों ने ही बीमार होने पर ठुकरा दिया। अब यहां उनका हर माह जांच के साथ बेहतर उपचार भी हो रहा है। हर सप्ताह निरीक्षण भी टीम द्वारा किया जाता है।

-श्रवण कुमार गुप्ता, जिला प्रोबेशन अधिकारी

Posted By: Jagran