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मेरठ, जेएनएन। Hindi Diwas 2019 शहर के एक कांफ्रेंस हाल में एक कार्यक्रम चल रहा था। एक सज्जन ने माइक संभाला और बड़े अजीब तरीके से हंसते हुए अपनी बात कुछ यूं शुरू की कि साहेबान, मेरी हिंदी थोड़ी कमजोर है, कहीं कुछ चूक हो जाए तो क्षमा करिएगा। जरा सोचिए ..और पूरी गंभीरता से सोचिए कि अगर उन सज्जन की अंग्रेजी कमजोर होती तो क्या उतनी ही मुस्कुराहट बिखेरते हुए वो इसका ऐलान कर सकते थे कि साहेबान, मेरी अंग्रेजी कमजोर है, कहीं कुछ चूक हो जाए तो क्षमा करिएगा। कदापि नहीं, वो कभी स्वीकार न करते कि उनकी अंग्रेजी कमजोर है।

करेंगे चिंता
बहरहाल, यह प्रसंग भले ही विषय को समझाने के लिए हो लेकिन लब्बोलुआब यह कि ऐसे दृश्य आप आम देखते होंगे जब हिंदी में कमजोर होने को लोग अपने अंग्रेजी में पारंगत होने से जोड़कर गवरेक्ति करते हैं। शनिवार 14 सितंबर को एक बार फिर हिंदी दिवस है। एक बार फिर लोग हिंदी की दशा और दिशा को लेकर चिंता करेंगे।

गंभीरता की जरूरत
गोष्ठियां होंगी जिनमें बड़ी-बड़ी बातें होंगी ..लेकिन हिंदी के प्रति हमारी चिंता ने हिंदी का कितना भला किया है, यह सचमुच अब गंभीरता से सोचने की जरूरत है। आलम यह है कि गंगा-यमुना की हिंदी बेल्ट में रहने, मूल व मातृभाषा हिंदी होने के बाद भी अगर हम सही हिंदी लिख और पढ़ न पाएं तो फिर दूसरे किस क्षेत्र के लोगों से उम्मीद करेंगे कि वे हमारी हिंदी सही कर देंगे।

गलत तरीके से लिखी जा रही
बहरहाल, शहर में कई जगह नोटिस बोर्ड, होर्डिग पर गलत तरीके से हिंदी लिखी गई है। यह स्थित एक जगह नहीं कई जगह देखने को मिल जाएगी। चाहे वह विश्वविद्यालय हो, कॉलेज हों, रेलवे स्टेशन, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी विभाग के नोटिस बोर्ड हों या कोई दूसरे विभाग, अधिकांश जगह हिंदी के गलत लेखन को देख हिंदी प्रेमी मायूस हो जाते हैं।

सीसीएसयू में भी गायब हिंदी की बिंदी
मेरठ और सहारनपुर मंडल के एक हजार से अधिक कॉलेजों को संबद्धता देने वाले और हर साल लाखों छात्रों को डिग्री देने वाले चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय में भी हिंदी की बिंदी बिगड़ी है। विश्वविद्यालय में प्रवेश करते ही दाएं तरफ विश्वविद्यालय के संकल्प को प्रदर्शित करने के लिए एक बड़ा बोर्ड लगा है।

गलतियां ही गलितयां
अंग्रेजी में लिखे संदेश में तो कोई गलती नहीं है लेकिन हिंदी में लिखी तीन पंक्तियों में सबसे नीचे सर्वोच्च की जगह -सर्वाच्च -लिखा हुआ है। विवि के प्रशासनिक भवन के पास जहां सभी अधिकारी बैठते हैं, वहां स्वयं जैसे सामान्य शब्द को भी सही नहीं लिखा गया है। य की जगह व पर बिंदी लगी है। आठ पंक्तियों के इस संदेश की हर पंक्ति में कोई न कोई गलती है। व्यक्तित्व, सामाजिक, समस्याओं, व्यावहारिक जैसे शब्द भी सही नहीं लिखे गए हैं। किसी सर्वोच्च शिक्षण संस्थान में ऐसा होना दुखदाई है। 

Posted By: Prem Bhatt

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