मेरठ, जेएनएन। भारत की आधी से ज्यादा आबादी आज भी गांवों में बसती है। पूरे भारत देश में 6.30 लाख के लगभग गांव हैं। अगर भारत के इन गांवों में रहने वाले लोग आत्मनिर्भर हो जाएं तो भारत अपने आप आत्मनिर्भर बन जाएगा। यह कहना है हिमाचल केंद्रीय विवि शिमला के पूर्व कुलपति प्रो. एडीएन बाजपेई का। जो सीसीएसयू के राजनीति विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित ई कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।

15 दिवसीय ई-कार्यशाला में कोविड-19 के साथ जीवन स्वावलंबी भारत की रूपरेखा विषय पर उन्होंने कृषि क्षेत्र को सशक्त और उसमें सुधार करने पर जोर दिया। कहा कि गांव में जो व्यक्ति कृषि में हैं उसमें नए रोजगार पैदा किए जाने चाहिए। विवि के कुलपति प्रो. नरेंद्र कुमार तनेजा ने कहा कि भारत सरकार पं दीनदयाल उपाध्याय के अंतोदय के आधार पर अर्थनीति का निर्माण कर रही है।

जिससे देश के गरीब मजदूर और अंतिम व्यक्ति तक मूलभूत संसाधन, उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके। प्रफुल्ल केतकर ने कहा कि स्वावलंबी समाज का निर्माण भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा के आधार पर ही हो सकता है। जब तक हम स्वदेशी का स्वयं चितन नहीं करेंगे। तब तक हम स्वावलंबी नहीं बन सकते। भारतीय समाज एक दूसरे के सहयोग और पोषण और संपोषण से चलती है। प्रो. पवन कुमार शर्मा विभागाध्यक्ष ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का आर्थिक चितन समाज के सभी वर्गों के उत्थान की बात करता है। डा. राजेंद्र कुमार पांडेय ने अतिथियों का स्वागत एवं परिचय कराया। संचालन भानु प्रताप ने किया।

Posted By: Jagran

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