मेरठ, जेएनएन। स्वच्छ सर्वेक्षण की रैंकिंग सुधारने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन नालों में गोबर खुलेआम बहाया जा रहा है। हाल ये है कि न हाईकोर्ट के आदेशों का पालन हो रहा है और न एनजीटी के निर्देशों का। नालों को गोबर की गंदगी से मुक्त कराने में नगर निगम पूरी तरह विफल है।

रेलवे रोड चौराहा पर डीएन कालेज के समीप नाले से दो दिन में नगर निगम ने करीब 10 ट्राली गोबर निकाला। जो चौराहे के पास सड़क पर पड़ा हुआ है। जितना गोबर निकाला गया उसका दोगुना गोबर फिर नाले में जमा हो गया है। यह गोबर मकबरा डिग्गी व आसपास के इलाके में बसी अवैध डेयरियों का है। यह केवल बानगी है। इसी तरह ओडियन नाला, पांडवनगर नाला, मोहनपुरी नाला, कोटला नाला समेत शहर के लगभग सभी छोटे-बड़े नालों की स्थिति ऐसी ही है। ओडियन नाला तो गैस चैंबर में तब्दील हो चुका है। इस नाले में गैस के बुलबुले देखे जा सकते हैं।

निगम की कार्रवाई भी दिखावा

शहर से अवैध डेयरियों को बाहर करने का आदेश हाईकोर्ट दे चुका है। एनजीटी के निर्देश हैं कि नालों में गोबर नहीं बहाया जा सकता है। जिसके पालन में कभी अवैध डेयरियों पर नोटिस चस्पा करने का अभियान चलता है तो कभी सबमर्सिबल पंप उखाड़े जाते हैं। कभी जुर्माना लगा दिया जाता है। लेकिन इन कार्रवाइयों से नाले में गोबर बहाना बंद नहीं हुआ। निगम की कार्रवाई दिखावा बन कर रह गई है।

नगर निगम बोर्ड भी लाचार

आठ जनवरी को नगर निगम बोर्ड के गठन को तीन साल हो गए हैं। जिसे शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाने के लिए नालों में गोबर बहाने पर रोक लगाने की पहल करनी चाहिए थी। लेकिन यह काम नगर निगम बोर्ड भी नहीं कर सका है। महानगर राज्य स्मार्ट सिटी में शामिल है। सड़क-चौराहों पर गोबर के ढेर शोभा नहीं देते हैं। हाईकोर्ट और एनजीटी के निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। अवैध डेयरियों द्वारा नालों में गोबर बहाया जाता है। यह मुद्दा नगर निगम बोर्ड में पार्षदों ने कई बार उठाया है। बोर्ड ने कार्रवाई के लिए कई बार कहा भी है। लेकिन नगर निगम अधिकारियों की तरफ से कार्रवाई में खानापूर्ति की जा रही है।

सुनीता वर्मा, महापौर

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