मेरठ, जेएनएन। जीन हमारे जीवन की कुंजी हैं। हम जैसे दिखते या करते हैं, यह काफी हद तक हमारे डीएनए में छिपे सूक्ष्म जीन तय करते हैं। जीन मानव इतिहास और भविष्य की ओर भी संकेत करते हैं। ये बातें चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय के जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग विभाग की ओर से आयोजित इंटरनेशनल कांफ्रेंस में पांडिचेरी यूनिवर्सिटी के डॉ. बसंत तिवारी ने कही।

तीन दिवसीय सेमिनार के अंतिम दिन तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. तिवारी ने बताया कि जीन वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि एक बार मानव जाति के सभी जीनों की संरचना का पता लग जाए तो मनुष्य की जीन कुंडली के आधार पर उसके जीवन की सभी जैविक घटानाओं और दैहिक लक्षणों की भविष्यवाणी की जा सकती है। हालांकि जीन का परीक्षण करना आसान नहीं है, शरीर में लाखों जीवित कोशिकाएं होती हैं, जीनों के इस विशाल समूह को जीनोम कहते हैं। कृषि और बागवानी के क्षेत्र में बीजों की सही जाति का परीक्षण डीएनए फिंगर प्रिंटिंग से किया जा सकता है। जीनोम से पौधों में नर और मादा की पहचान की जा सकती है।

शुगरकेन ब्रीडिंग इंस्टीट्यूट कोयंबटूर से आए डॉ. ए. चिन्मय ने बताया कि जंगली गन्ने की प्रजाति के पौधे मजबूत और रोग प्रतिरोधक होते हैं, लेकिन वह चीनी उत्पादन के लिए ठीक नहीं हैं। इस प्रजाति से संकर प्रजातियां विकसित की जा सकती हैं। कांफ्रेंस में कनाडा से आए डॉ. रॉन एमडी पॉव ने गेहूं के जीन में बदलाव करके अधिक उत्पादन देने वाली प्रजातियों पर रिसर्च करने के लिए कहा। उन्होंने भारतीय वैज्ञानिकों को इस दिशा में किए जाने वाले प्रयास की सराहना की। डॉ. डोलेजल ने विशेष चर्चा में बढ़ते तापमान में भी गेहूं के उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया। कांफ्रेंस के संयोजक प्रो. एसएस गौरव ने सभी को धन्यवाद दिया। कांफ्रेंस के चेयरपर्सन प्रो. पीके शर्मा सहित छात्र- छात्राएं उपस्थित रहे।

पोस्टर प्रजेंटेशन में रिद्धि अव्वल

कांफ्रेंस में पोस्टर प्रजेंटेशन में प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इसमें पहला पुरस्कार रिद्धि खुराना, दूसरा पुरस्कार दीप्ति चतुर्वेदी और तीसरा पुरस्कार हेमंत शर्मा को मिला।

Posted By: Jagran

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