गंगा एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार बनी जानलेवा, सात दिन में 50 जंगली जानवर मरे और 11 बड़े हादसे
गंगा एक्सप्रेसवे पर वाहनों की तेज रफ्तार और जंगली जानवरों के प्रवेश के कारण सात दिनों में 50 जानवरों की ...और पढ़ें

HighLights
सात दिन में 50 जंगली जानवरों की मौत।
मेरठ-बदायूं खंड पर 11 बड़े सड़क हादसे।
तेज रफ्तार और जानवरों का प्रवेश मुख्य कारण।
अनुज शर्मा, मेरठ। गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के साथ ही इस पर वाहन 150 किमी से भी ज्यादा गति से दौड़ रहे वाहन कैमरों में कैद हो रहे हैं।जंगली जानवर भी सुरक्षा दीवार फांदकर तथा अधूरी दीवारों से एक्सप्रेसवे से प्रवेश करके इन अंधाधुंध दौड़ते वाहनों के सामने आकर दुर्घटनाएं करा रहे हैं।मात्र सात दिन में ही एक्सप्रेसवे पर 50 जंगली जानवरों की मौत हुई है।
इसी अवधि में मेरठ से बदायूं के बीच 11 बड़े हादसे हुए।जंगली जानवरों के प्रवेश की ज्यादा समस्या अमरोहा और संभल क्षेत्र में आ रही है।यूपीडा का दावा है कि गंगा एक्सप्रेसवे 120 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति की अनुमति वाले चुनिंदा एक्सप्रेसवे में से एक है। अत्यधिक गति ही यहां हादसो का कारण बन रही है।
गंगा एक्सप्रेसवे यातायात प्रबंधन की अत्याधुनिक तकनीक आटोमेटिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एटीएमएस) से युक्त है। मेरठ से बदायूं के बीच दो कंट्रोल रूम और प्रत्येक किमी पर कोरियाई पीटीजेड कैमरे और स्पीड मीटर अलग से लगे हैं। जो ओवरस्पीड वाहनों को चिह्नित कर रहे हैं।
एक्सप्रेसवे पर वर्तमान में 15 हजार से ज्यादा हल्के और भारी वाहन गुजर रहे हैं। इनमें से रोजाना 90 से 100 वाहन ओवरस्पीड चिह्नित हो रहे हैं।इन वाहनों के लिए एक्सप्रेसवे पर प्रवेश करने वाले जंगली जानवर मुसीबत बने हैं। केवल सात दिन में मेरठ से बदायूं के बीच 50 जंगली जानवरों की मौत हुई।इनके न अन्य कारणों से यहां 11 बड़ी सड़क दुर्घटनाएं हुई।
जानवरों का प्रवेश कैसे रोकें, ले रहे सलाह
एक्सप्रेसवे की संचालन कर्ता एजेंसी आरआरबी इंफ्रा के सीजीएम अनूप सिंह का कहना है कि नील गाय और अन्य जंगली जानवर सुरक्षा दीवार फांदकर एक्सप्रेसवे पर पहुंच रहे हैं। अधूरी दीवार वाले स्थानों को तो चिह्नित करके पूरा कराया जा रहा है वहीं जानवरों को दीवार फांदने से रोकने के उपाय के लिए विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है।
ओवरस्पीड वाहनों के होंगे चालान
अधिकारियों ने बताया कि एटीएमएस सिस्टम को सीधे भारत सरकार के वाहन पोर्टल से जोड़ा गया है।अभी तकनीकी खामी के चलते ओवरस्पीड वाहनों का डाटा ट्रांसफर नहीं हुआ है। एक दो दिन में यह कमी दूर हो जाएगी। जिसके साथ ही ओवरस्पीड चलने वाले वाहनों के मालिकों को मोबाइल पर चालान के मैसेज मिल जाएंगे।
बीच सड़क पर खराब हुए 93 वाहन, 54 ने मांगी हेल्पलाइन से मदद
एटीएमएस सिस्टम के आंकड़ों के मुताबिक 18 से 24 मई तक सात दिन के भीतर मेरठ से बदायूं के बीच कुल 93 वाहन बीच सड़क पर बंद हुए। इनका कारण पेट्रोल खत्म होना, पंक्चर, इंजन में गड़बड़ी अथवा अन्य खामी रही। जिनको मदद पहुंचाई गई। 54 वाहन चालकों ने हेल्पलाइन 14449 पर फोन करके रास्ता पूछा अथवा मदद मांगी। एक्सप्रेसवे पर पेट्रोलिंग करने वाले वाहनों ने 55 वाहनों की मदद की।
