Gandhi Jayanti: आगा खान पैलेस में बापू का अनशन... मेरठ कॉलेज में 194 घंटे का अखंड हवन; मेरठ में स्मृतियां आज भी जीवंत
Mahatma Gandhi Jayanti: महात्मा गांधी ने मेरठ की धरती पर दो बार कदम रखे, जहां उनके आगमन पर भव्य स्वागत ...और पढ़ें

मेरठ में आगमन के दौरान आसौडा में चौधरी रघुवीर नारायण सिंह की कोठी पर आयोजित सभा में महात्मा गांधी। (ओरिजनल फोटो को AI की मदद से बेहतर किया गया है)
HighLights
गांधी जी ने 1920 और 1929 में मेरठ का दौरा किया।
उनके स्वागत में शहर में पुष्पवर्षा और सभाएं हुईं।
ओम बाजपेयी, मेरठ। बंदे में था दम...वंदे मातरम। महात्मा गांधी के एक आह्वान में इतना ही दम था। तभी तो राष्ट्रकवि सोहनलाल द्विवेदी ने उनके व्यक्तित्व को कुछ यूं उकेरा कि, चल पड़े जिधर दो डग, मग में, चल पड़े कोटि पग उसी ओर। पड़ गई जिधर भी एक दृष्टि गड़ गए कोटि दृग उसी ओर। यह सौभाग्य है कि महात्मा गांधी के पग दो बार मेरठ की धरती पर पड़े, जिनके चिह्नों की चमक आज भी मौजूद है।

मेरठ के वैश्य अनाथालय में गांधीजी के हस्तलिखित लेख का शिलापट। जागरण
दुनिया के साथ मेरठ भी मोहनदास करमचंद गांधी के महात्मा बनने की यात्रा न केवल देख रहा था, बल्कि साक्षात उसमें भागीदार भी रहा। मेरठ में उनका आगमन पहली बार 22 जनवरी 1920 को हुआ था। दूसरी बार 1929 को। क्रांति धरा मेरठ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से उनके संबंध बेहद नजदीक के थे। यही कारण है कि जब 1943 को उन्होंने 21 दिन का उपवास रखा था। तो मेरठ कालेज में उनके लिए 194 घंटे का अखंड हवन आयोजित किया गया था।
बापू पर हुई थी पुष्पवर्षा
1920 में गांधी जी देवनागरी इंटर कालेज (डीएन इंटर कालेज) में आए थे। वहां उनका भव्य स्वागत किया गया था। यहां पर उन्हें बग्घी में बैठ कर शहर का भ्रमण कराया गया था। कबाड़ी बाजार में गांधी पर लोगों ने पुष्पवर्षा की थी। इतिहासकार डा. अमित पाठक ने बताया कि इस दौरान ही उनकी जिमखाना मैदान में सभा भी हुई थी। महात्मा गांधी का मेरठ कालेज में आगमन 1920 में हुआ था।
असहयोग आंदोलन और रौलेट एक्ट के विरोध में भारत भ्रमण कर रहे थे। इसे काला कानून कहा गया, क्योंकि इसके तहत बिना मुकदमा चलाए किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को दो साल तक जेल में रखने का अधिकार था। इसी के तहत वह मेरठ में भी आए थे। मेरठ कालेज का ओल्ड हाल, जिसे आज मंगल पांडे सभागार कहा जाता है। उसके सामने एक मैदान था। अब यह वाटिका का रूप ले चुका है, जहां शहीद स्मारक भी बना है।
मेरठ कालेज इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष डा. केडी शर्मा ने बताया कि इस मैदान में ही गांधी जी की सभा हुई थी। छात्रों और शिक्षको ने एक चांदी की प्लेट और कुछ रकम भी भेंट की थी। गांधी जी के सम्मान में मेरठ कालेज के तत्कालीन प्रधानाचार्य जैफी अपने जूते नीचे उतारकर मंच पर गांधी के साथ बैठे थे। महात्मा गांधी कैसल व्यू में भी आए थे। कोठी के अंदर वाले गेट के सामने खाली स्थान पर उनका मंच लगा था। यहां पर उन्होंने भोजन भी किया था। भोजन पत्तलों में परोसा गया था।
महात्मा गांधी के 21 दिन चले उपवास पर हुआ हवन
1942 में असहयोग आंदोलन के दौरान अंग्रेजों ने जब आंदोलन को दबाने का प्रयास किया जो कई जगह हिंसा हुई। जिस पर अंग्रेज हुकूमत ने इसके लिए गांधी जी को जिम्मेदार ठहराया। इसके विरोध में 73 साल की उम्र में गांधी ने पुणे के आगा खान महल में 21 दिनों का अनशन शुरू किया।
उस समय महात्मा गांधी शारीरिक रूप से काफी कमजोर गए थे। मेरठ कालेज परिसर में गांधी जी के स्वास्थ्य को लेकर प्रार्थना का दौर चला था। उपवास की समाप्ति पर तीन मार्च 1943 को 194 घंटे का अखंड हवन किया गया था। नारायण स्वामी के द्वारा एक बरगद का एक पेड़ भी लगाया था, जो आज विराट रूप ले चुका है।
गांधी आश्रम की दुकानों पर 25 प्रतिशत छूट आज से
दो अक्टूबर गांधी जयंती पर गढ़ रोड गांधी आश्रम में चरखा से सूत कातने का कार्य चल रहा है। क्षेत्रीय गांधी आश्रम मेरठ के मंत्री पृथ्वी सिंह रावत ने बताया कि मेरठ की 10 दुकानों पर दो अक्टूबर से 31 जनवरी तक 25 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। गढ़ रोड, सुभाष बाजार, घंटाघर, मवाना, सरधना, किठौर, साबुन गोदाम कालोनी, खरखौदा में यह दुकानें हैं।
