मेरठ : दिल्ली रोड स्थित राज स्नेह कार शोरूम बंद होने से लगभग 500 कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं। शनिवार को हंगामे के बाद कर्मचारियों को वेतन तो दे दिया गया लेकिन अभी कर्मचारियों की जमानत राशि के रूप में करीब 80 लाख रुपये कंपनी पर बकाया है।

एक समय में शहर में सबसे ज्यादा कार बिक्री करने वाले राज स्नेह के सभी शोरूम पर ताला लग गया है। कंपनी में लगभग 500 कर्मचारी कार्यरत थे। इनमें सात हजार रुपये से दो लाख रुपये प्रतिमाह पाने वाले छोटे-बड़े कर्मचारी शामिल हैं। प्रबंधन हर कर्मचारी के वेतन के बराबर जमानत राशि जमा रखता था, जिसे नौकरी छोड़ने पर कर्मचारी को दिया जाता था। कंपनी हर माह 80-90 लाख रुपये वेतन के रूप में बांटती थी। शनिवार को जब कर्मचारी पिछले माह का वेतन लेने पहुंचे तो उन्हें टरकाया गया। हंगामा करने पर सबसे पहले महिला कर्मियों और फिर अन्य कर्मचारियों को वेतन दिया गया लेकिन जमानत राशि वापस नहीं की गई। कर्मियों ने हंगामा कर मालिकों को बुलाने की मांग की। एजीएम अजय भारद्वाज ने कर्मचारियों को 22 अक्टूबर तक सिक्योरिटी राशि का भुगतान करने का आश्वासन दिया। इसके बाद कर्मचारी शांत हुए। गौरतलब है कि नियमों के विरुद्ध कारों की बुकिंग के कारण मारुति ने राजस्नेह शोरूम को पिछले छह माह से कारों की आपूर्ति नहीं की है। करोड़ों रुपये कर्ज के चलते भी शो रूम बंद होने की चर्चाएं हैं।

राशन कार्ड बन रहा, न हो रही आधार फीडिंग

मेरठ : जिले में इस समय नया राशन कार्ड बन रहा है और न ही आधार फीडिंग हो पा रही है। इस समस्या को डेढ़ महीने हो गए हैं लेकिन खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर से इसके समाधान के कदम नहीं उठाए गए।

डेढ़ महीने पहले मेरठ समेत प्रदेश के 43 जिलों में राशन घोटाला पकड़ा गया था। इस घोटाले के पीछे राशन डीलर व ऑपरेटरों का हाथ बताया गया था। ये सब ऑपरेटर निजी स्तर पर रखे गए थे। यानी इनका पारिश्रमिक विभागीय अधिकारी अपने स्तर से देते थे। प्रकरण विवादित होने पर मेरठ के दर्जनों ऑपरेटर उस समय हटा दिए गए थे। ये ऑपरेटर राशन कार्ड के फार्म भरते थे और पूर्ति निरीक्षकों के डिजिटल हस्ताक्षर भी करते थे। ऑपरेटरों के न होने से सैकड़ों आवेदन पात्रता की जांच पूरी होने के बाद भी फीडिंग का इंतजार कर रहे हैं।

Posted By: Jagran