बेटी की सहानुभूति पाकर फांसी न बच पाए मुस्कान... इसलिए इन्फ्लुएंसर फैजान ने रखा परवरिश की पेशकश
पति सौरभ राजपूत की हत्या में फांसी की सजा पाने वाली मुस्कान की 10 वर्षीय बेटी राधा की परवरिश का ...और पढ़ें

जिला शासकीय अधिवक्ता केके चौबे से बातचीत करते इन्फ्लुएंसर फैजान अंसारी : वीडियो ग्रैब
HighLights
फैजान ने मुस्कान की बेटी राधा की परवरिश की पेशकश की।
मकसद मुस्कान को बेटी की सहानुभूति से फांसी से रोकना है।
जागरण संवाददाता, मेरठ। पति सौरभ राजपूत की हत्या में फांसी की सजा मिलने के बाद बचने को कानूनी विकल्प तलाश रही मुस्कान के सामने बुधवार को मुंबई से आए इंटरनेट मीडिया इन्फ्लुएंसर फैजान अंसारी ने नई परेशानी खड़ी कर दी है। उसने जिला शासकीय अधिवक्ता से मिलकर उसकी 10 साल की बेटी मन्नत उर्फ राधा की परवरिश की पेशकश की। कहा, उसका मकसद मुस्कान को फांसी के फंदे तक पहुंचाना है। वह बेटी की सहानुभूति से इस सजा से राहत न पा लें, इसलिए वह ताउम्र उसकी हर जिम्मेदारी व खर्च उठाने को तैयार है।
बुधवार दोपहर फैजान डीजीसी केके चौबे से उनके कार्यालय में मिले। उनसे कहा कि वह राधा का अब से लेकर शादी तक व अन्य खर्च उठाने को तैयार है। उनका उद्देश्य लोकप्रियता पाना नहीं, बल्कि बच्ची को बेहतर शिक्षा, माहौल व इस केस की पीड़ा से बचाना है। कहा कि 10 माह की बच्ची राधा को मुस्कान-साहिल कृत्य की सजा नहीं मिलनी चाहिए। मुस्कान की बड़ी बेटी पीहू की स्वजन जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
सैफ अली खान पर हुए हमले में घायल आटो चालक की भी उन्होंने मदद की है। 14 अक्टूबर को मुस्कान को पति सौरभ राजपूत की हत्या में मौत की सजा सुनाई गई है। 24 नवंबर 2025 को राधा का जन्म हुआ था। राधा मेरठ जिला जेल में अपनी मां मुस्कान के साथ रह रही है।
शबनम के बेटे को उस्मान ने लिया था गोद
बुलंदशहर के उस्मान सैफी व उसकी पत्नी वंदना ने अमरोहा के चर्चित बावनखेड़ी कांड में फांसी की सजा पाए शबनम के बेटे ताज को गोद लिया था। अप्रैल 2008 में अमरोहा जिले के बावनखेड़ी गांव निवासी शबनम ने अपने प्रेमी सलीम संग मिलकर अपने ही परिवार के सात लोगों की हत्या कर दी थी। घटना के समय शबनम गर्भवती थी। उसने दिसंबर 2008 में रामपुर जेल में बेटे को जन्म दिया था।
ऐसे मामलों में यह है नियम
डीजीसी केके चौबे ने बताया कि जेल में बंद किसी भी सजायाफ्ता महिला कैदी के जेल में पैदा हुए बच्चे को गोद देने का अधिकार जिलाधिकारी, जेल प्रशासन को है। जिला बाल कल्याण समिति महिला कैदी की सहमति के बाद गोद देने का नियमानुसार एक प्रक्रिया के तहत निर्णय ले सकती है। नियमानुसार ऐसे बच्चे को तीन वर्ष की आयु से पहले किसी को नहीं सौंपा जा सकता है।
बच्चा अधिकतम छह साल तक ही मां संग जेल में रह सकता है। राधा का मामला अलग है। मुस्कान के मायके व ससुराल, दोनों पक्ष के लोग मौजूद है। दोनों में से यदि कोई बच्ची को लेना चाहेगा तो मां की सहमति के बाद बच्ची उन्हें सौंप दी जाएगी।
