मेरठ, [अनुज शर्मा]। Scam in expressway compensation दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के भूमि अधिग्रहण के दौरान रिश्तेदारों के नाम भूमि खरीदकर कई गुना मुआवजा भुगतान करके करोड़ों के घोटाले के आरोपित पूर्व एडीएम (भूमि अध्याप्ति) समेत आठ के विरुद्ध दर्ज एफआइआर की जांच गृह विभाग की विशेष टीम से कराने की सिफारिश कमिश्नर ने की है। गाजियाबाद पुलिस ने केवल एक व्यक्ति के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किया था, बाकी सात आरोपमुक्त हो गए थे। एसएसपी गाजियाबाद ने कमिश्नर को भेजी रिपोर्ट में बताया है कि मामले की नए सिरे से विवेचना सीओ को सौंपी है।

कमिश्नर ने की गृह विभाग से सिफारिश

कमिश्नर अनीता सी मेश्राम ने बताया कि एसएसपी की मांग पर उन्होंने गृह विभाग को विशेष जांच टीम गठित करके एफआइआर की जांच की सिफारिश की है। कमिश्नर का कहना है कि मामला वरिष्ठ अफसरों से जुड़ा है लिहाजा एसआइ स्तर का व्यक्ति निष्पक्ष जांच नहीं कर पाएगा। पुलिस अफसरों को अधिग्रहण व मुआवजा संबंधी नियमों की जानकारी भी नहीं होती है।

थाना कविनगर में दर्ज है आठ के विरुद्ध एफआइआर

ग्रामीणों की शिकायतों पर तत्कालीन कमिश्नर डा. प्रभात कुमार ने मुआवजा घोटाले की जांच कराई थी। अपर आयुक्त और तत्कालीन डीएम गाजियाबाद की अलग-अलग जांच में साबित हुआ था कि मुआवजा निर्धारण में सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों का घोटाला हुआ। कमिश्नर ने सीबीआइ जांच की सिफारिश शासन से की थी। गाजियाबाद के थाना कविनगर में तत्कालीन एडीएम भूमि अध्याप्ति घनश्याम सिंह और उनके पुत्र समेत कुल आठ लोगों के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराई गई थी।

आठ में से सात आरोपमुक्त किए तो मचा हंगामा

शासन ने इस घोटाले में दो पूर्व डीएम के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया लेकिन गाजियाबाद पुलिस ने आठ आरोपितों में से पूर्व एडीएम समेत सात को आरोपमुक्त कर दिया। केवल एक व्यक्ति के विरुद्ध कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। इस पर कमिश्नर ने एसएसपी गाजियाबाद का जवाब तलब किया था। 

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