मेरठ। बोर्ड परीक्षा को लेकर अभी से छात्र एग्जाम फोबिया के शिकार हो रहे हैं। परीक्षा में असफल होने का भय उनके मन में इस कदर समाया है कि न अभिभावक समझ पा रहे हैं और न ही अध्यापक। परीक्षा से पहले अनचाहे डर से निजात पाने के लिए ऐसे छात्र जिला अस्पताल के मन कक्ष में काउंसिलिंग के जरिए तनाव को कम करने का प्रयास कर रहे हैं।

प्यारेलाल शर्मा जिला अस्पताल स्थित मन कक्ष में एग्जाम फोबिया के केस आने शुरू हो गए हैं। दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा को लेकर छात्रों में डर बैठ गया है। एक सप्ताह के भीतर चार छात्रों ने काउंसिलिंग ली है। जिनकी उम्र 15 से 18 साल के बीच है। एग्जाम फोबिया के शिकार होने पर छात्रों में घबराहट, बेचैनी, हताशा, चिड़चिड़ापन और नींद में कमी आदि लक्षण सामने आ रहे हैं। काउंसलर रश्मि भटनागर ने बताया छात्रों में कई तरह की हीन भावनाएं देखी जा रही हैं। जैसे फेल हुए तो लोग क्या करेंगे। दोस्त के नंबर अधिक आ गए तो परिजनों को क्या जवाब देंगे। छात्रों ने परीक्षा को हौव्वा बना लिया है। इससे उनमें नकारात्मक भाव पैदा हो रहे हैं। वे अपने को बीमार मान बैठते हैं। इससे डिप्रेशन की स्थिति बन रही है। सकारात्मक सोच बढ़ाएगी आत्म विश्वास

काउंसलर रश्मि भटनागर ने कहा कि ऐसे छात्रों से पहले उनकी समस्याएं सुनी जाती है, फिर उन्हें सकारात्मक सोच के लिए प्रेरित करते हैं। असफल लोगों की सफलता के किस्से भी सुनाते हैं। सलाह दी जाती है कि मन में कोई बात न रखें। परिजनों को खुलकर बताएं। आत्मविश्वास बढ़ेगा तो एग्जाम फोबिया से निजात मिलेगी। इन बातों का रखें ध्यान

-परीक्षा को लेकर मन में भय ने रखें।

-परीक्षा से पहले दिनचर्या सही करें।

-प्रतिदिन का रूटीन कार्य तय कर लें।

-समय से संतुलित डाइट लें।

-मनरंजन नहीं, पढ़ाई में मन लगाएं।

-मन में कोई बात है तो साझा करें।

-मोबाइल का उपयोग कम करें।

-रात में नींद पूरी लेने की कोशिश करें।

Posted By: Jagran