मेरठ, जेएनएन। टीम को आरोपितों के पास से काफी कुछ मिला है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण एक डायरी हाथ लगी है। इससे मिली जानकारी ने सभी को चौंका दिया। इसमें नाम-पते और मोबाइल नंबर के साथ ही लेनदेन का पूरा ब्योरा है। कहां जाना था और कहां-कहां जा चुके हैं, इसकी भी डिटेल है। साथ ही रास्ते और रुकने-खाने का भी हिसाब है।

नौकरी के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाले हिसाब को डायरी में दर्ज कर रहे थे। डायरी पिछले साल बनाई गई थी, जिसमें इस साल का अभी तक का पूरा लेनदेन है। मेरठ में किस होटल में रुके। उसका नंबर क्या है। कौन से कमरे में कौन-कौन रुका हुआ है। खाने और पीने तक के रुपये लिखे हुए हैं। इसके साथ ही नौकरी लगवाने वाले युवकों के नाम भी बड़ी संख्या में लिखे हुए हैं। सभी से लिए गए रुपयों का भी हिसाब है। एडवांस के साथ ही बकाया के बारे में भी लिखा है। मोबाइल नंबर भी दर्ज हैं। सभी से लाखों रुपये लिए हुए लिखे हैं। पूछताछ में भी आरोपितों ने बताया था कि करीब ढाई लाख रुपये एक व्यक्ति से ले रहे थे। इसके साथ ही नोटरी का भी एक कागज मिला है। कुल मिलाकर डायरी का हर पन्ना काले कारनामों का सुबूत है। पुलिस ने डायरी को कब्जे में ले लिया है।

नियुक्ति पत्र लेकर आए थे

आरोपितों के पास से नियुक्ति पत्र भी बरामद हुआ है। सभी युवकों को टेरिटोरियल आर्मी में भर्ती कराना था। यह नियुक्ति पत्र 21 जनवरी 21 का है। हालांकि इस संबंध में पुलिस पूछताछ में जुटी है कि कहीं अंदर का भी तो काई व्यक्ति आरोपितों से नहीं मिला हुआ। पूछताछ में पता चला कि आरोपित 12 जनवरी को महाराष्ट्र से चले थे। सतारा से दिल्ली आए और वहां से मेरठ पहुंचे थे। यहां एक कमरे में चार लोग और अन्य दो कमरों में तीन-तीन लोग रुके हुए थे।

मोबाइल लिए कब्जे में, संबंधों की पड़ताल

पुलिस ने सभी के मोबाइल फोन भी ले लिए हैं। युवकों के स्वजन को जानकारी दे दी गई है। साथ ही दोनों आरोपितों के मोबाइल फोन को खंगाला जा रहा है। कई महत्वपूर्ण जानकारी भी पुलिस के हाथ लगी हैं। उनसे जुड़े हुए लोगों के बारे में पता लगाया जा रहा है। कई सालों से आरोपित इस काम को कर रहे थे। सूत्रों ने बताया कि युवकों से मार्कशीट से लेकर प्रमाण पत्र, फोटो और अन्य जरूरी कागजात लेते थे, ताकि किसी को कोई शक न हो। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि किसी को भर्ती तो नहीं करा दिया था।

पूर्व सैनिक ने बढ़ाई चिता

गिरफ्तार दो लोगों में से एक पूर्व सैनिक राजेंद्र दिलीप भिलारे है। उसके पास से सेना की कैंटीन का कार्ड और आधार कार्ड भी बरामद हुआ है। हालांकि उसे सेना में सेंधमारी से पहले ही पकड़ लिया गया, लेकिन यह अपने आप में चिता की बात है कि पूर्व सैनिक ही भर्ती कराने में लगा हुआ था। अब उसके बारे में पूरी जानकारी निकाली जा रही है। साथ ही सेना से भी उसके बारे में सभी डिटेल मांगी गई है।

टेरिटोरियल आर्मी

प्रादेशिक सेना यानी टेरिटोरियल आर्मी भारतीय सेना की ही एक इकाई है। सामान्य श्रमिक से लेकर प्रशासनिक कर्मचारी तक भारत के सभी 18 से लेकर 42 साल तक के नागरिक (जो शरीर से समर्थ हों) इसमें भर्ती हो सकते हैं। यह हमारी रक्षा पंक्ति की सेकेंड लाइन है। युद्ध के समय फ्रंट लाइन में तैनाती के लिए भी इसका उपयोग होता है। टेरिटोरियल आर्मी के स्वयं सेवकों को प्रति वर्ष कुछ दिनों का सैनिक प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर देश की रक्षा के लिए उनकी सेवाएं ली जा सकें। इसके लिए सिर्फ भारतीय नागरिक ही आवेदन कर सकते हैं। इसमें किसी भी आरक्षित श्रेणी के लोगों को आयु में छूट नहीं दी जाती है। मान्यता प्राप्त विवि से स्नातक की डिग्री होनी चाहिए।

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