मेरठ, जेएनएन। रविवार दोपहर 12 बजे पर्यावरण प्रदूषण रोकथाम एवं नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) के चेयरमैन भूरेलाल परतापुर चौराहे पर रुक गए। उन्हें मुजफ्फरनगर जाना था, लेकिन यहां पर धूल का गुबार देखकर गाड़ी रोक ली। प्लाईओवर के नीचे से पैदल चलते हुए थोड़ा आगे बढ़े। रिंग रोड और अंडरपास धूल में घिरा था। सड़क के किनारे पानी का छिड़काव करते देखा तो यहां पर एंटी स्माग गन के बारे में पूछा। कर्मचारी उन्हें पहचानता नहीं था, ऐसे में साफ बताया कि यह मेरठ है...जहां की धूल-धक्कड़ कहीं जाने वाली नहीं है। भूरेलाल का दौरा गोपनीय था, इसलिए बिना कुछ बात किए वो मुजफ्फरनगर की ओर बढ़ चले।

काला धुआं तो कहीं सफेद रसायन का ढेर

ईपीसीए के चेयरमैन भूरेलाल सड़क के किनारे स्थित औद्योगिक इकाइयों को देखते हुए मुजफ्फरनगर पहुंच गए। खतौली क्षेत्र और नेशनल हाईवे-58 पर सड़क के किनारे कई स्थानों पर ब्लीचिंग एजेंट फेंका हुआ मिला, जिसका प्रयोग कागजों में चमक पैदा करने के लिए किया जाता है। इसके बाद उनकी गाड़ी जानसठ की ओर मुड़ गई। थोड़ी दूर पर सीमेंट की कपनी की चिमनी से काला धुआं निकलता मिला। पास में एक पेपरमिल की चिमनी धुआं उगल रही थी, लेकिन भूरेलाल की गाड़ी खड़ी होते ही इंडस्ट्री बंद कर दी गई।

जानसठ रोड पर सड़क किनारे तीन स्थानों पर सफेद रसायन का ढेर लगा मिला। पूछने पर किसी ने इसे चूना तो अन्य ने ब्लीचिंग एजेंट बताया। विशेषज्ञ बताते हैं कि पेपरमिलों में प्रयोग किए जाने वाले ये रसायन जमीन को बंजर बना देते हैं। आगे बढऩे के साथ ही सड़क किनारे धूल, कचरा, प्लास्टिक और गन्ने के कोल्हू से निकलता धुआं नजर आया।

रजवाहों में जहर बुझा कचरा

जानसठ, भोपा और जौली रोड पर जगह-जगह कोयले की राख (फ्लाइएश) व प्लास्टिक का कचरा मिला। भूरेलाल ने जानसठ क्षेत्र में ही धंधेड़ा और जट मुझेड़ा के नाले का निरीक्षण किया, जिसमें विषाक्त कचरा अटा हुआ था। भयावह बदबू थी। भूरेलाल ने कहा कि इन्हीं रसायनों की वजह से भूजल में कैंसरकारक तत्व पहुंच गए हैं। तीनों रास्तों पर दर्जनभर रजवाहों का निरीक्षण किया।

जोली रोड स्थित विलासपुर गांव के पास स्वामी आत्मानंद ने बताया कि 15 साल पहले इस रजवाहे का पानी पीने योग्य था, लेकिन पेपरमिलों ने जलस्रोतों का तबाह कर दिया। भूरेलाल ने मुजफ्फरनगर जिले के औद्योगिक सेहत को बेहद खतरनाक बताया। भोपा रोड पर जली राख का ढेर देखकर रुक गए। दर्जनभर पेपरमिलों में प्रयोग किया गया रसायन भूजल दूषित करता मिला। बाद में खतौली से गुजरती गंगनहर पर बसे गांवों में शाम पांच बजे कूड़ा जलता देखकर नाराज हुए, और अधिकारियों को फोन कर रिपोर्ट तलब की।

अधिकारियों से जवाब-तलब

ईपीसीए के चेयरमैन भूरेलाल ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी आशीष तिवारी को फोनकर कड़ी नाराजगी जताई। पूछा कि...आप तो कह रहे थे कि पश्चिम उप्र में प्रदूषण कम कर लिया गया है, जबकि यहां तो भयावह हालात हैं। कहा कि माहभर पहले वो मेरठ आए, जहां अब तक कोई सुधार नहीं हुआ। मुजफ्फरनगर में हालात और खराब हैं। पूछा कि क्या महज कागजों पर काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि सफाई न होने की स्थिति में आखिर बोर्ड नगर निगम या नगर पालिका पर दंड क्यों नहीं लगा रहा? भूरेलाल ने मुजफ्फरनगर की जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी को फोन पर जिले में प्रदूषण की तस्वीर बताई। कहा कि वो गोपनीय दौरे पर आए, लेकिन यहां हालात भयावह हैं। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी एवं नगर पालिका के ईओ की क्लास लगाई। कहा कि दो दिन बाद होने वाली वीडियोकांफ्रेंसिंग में रिपोर्ट के साथ शामिल हों।

इन्होंने कहा...

एनसीआर में वायु प्रदूषण की बड़ी वजह धूल और धुआं है। मुजफ्फरनगर में दोनों की मात्रा भयावह नजर आ रही है। सॢदयों में स्थिति और खराब हो जाएगी। रजवाहों को बर्बाद कर दिया गया है, जिससे भूजल जहरीला हो रहा है। खतौली में खुले में कूड़ा जलाया जा रहा है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया गया है कि सफाई न होने पर नगर निगम या नगर पालिका पर दंड लगाया जाए। प्रशासन से लेकर बोर्ड और नगर निकाय तक का काम संतोषजनक नहीं मिला है।

- डा. भूरेलाल, चेयरमैन, ईपीसीए

सफाई कराना हमारा दायित्व नहीं है। यह मुजफ्फरनगर और खतौली के नगर पालिकाओं का काम है।

- आशीष तिवारी, अधिकारी, यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड 

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