मेरठ,जेएनएन। नगर निगम बोर्ड बैठक में गुरुवार को चर्चा के बाद वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए लगभग 671 करोड़ रुपये का मूल बजट पास कर दिया गया। नामांतरण शुल्क वृद्धि को भी खारिज कर दिया गया। उधर, शहर में खूंखार कुत्तों की समस्या पर पार्षदों ने जमकर हंगामा किया। आवारा कुत्तों की नसबंदी की व्यवस्था के लिए 50 लाख रुपये तक खर्च करने की अनुमति भी पार्षदों ने सर्वसम्मति से दे दी। अधिकारियों से पार्षदों ने कहा कि आश्वासन बहुत हो गए, अब खूंखार कुत्तों से निजात दिलाइए।

नगर निगम के तिलकहाल में सुबह 11 बजे वंदेमातरम के बाद मूल बजट पर चर्चा शुरू हुई। पार्षद ललित नागदेव ने साकेत मानसरोवर कालोनी के एक बच्चे और साकेत निवासी 75 वर्षीय एमएन अग्रवाल पर खूंखार कुत्तों के हमले का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि केवल साकेत ही नहीं, पूरे शहर में बच्चे-बुजुर्ग दहशत में हैं। पार्षद अनुज वशिष्ठ ने कहा कि शास्त्रीनगर में भी घरों से निकलना दूभर है। पार्षद अब्दुल गफ्फार, कार्यकारिणी उपाध्यक्ष रंजन शर्मा समेत अन्य पार्षदों ने भी अपने-अपने क्षेत्र की स्थिति रखी। इसके बाद नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. गजेंद्र सिंह ने बताया कि शंकर नगर फेज-दो में आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए एक ओटी, प्री-ओटी और मेडिकल स्टाफ के लिए कुल तीन कमरे बनने हैं। साउथ दिल्ली की टीम दौरा कर चुकी है। निर्माण अनुभाग ने 35 लाख का प्रस्ताव तैयार कर दिया है। महापौर सुनीता वर्मा ने नगर आयुक्त मनीष बंसल से कहा कि अब इसमें देरी क्यों हो रही है।

नगर आयुक्त ने कहा कि वे खुद देखेंगे व्यवस्था

नगर आयुक्त ने पूरे सदन को आश्वस्त किया कि अब कोई देरी नहीं होगी। ओटी, प्री-ओटी और मेडिकल स्टाफ रूम समेत नसबंदी केंद्र की सारी व्यवस्थाएं शीघ्र से शीघ्र दुरस्त कराई जाएंगी। जल्द से जल्द आवारा कुत्तों की नसबंदी व एंटी रैबीज वैक्सीनेशन शुरू किया जाएगा। साथ ही पालतू कुत्तों के लाइसेंस ज्यादा से ज्यादा बनाने व तेज गति से लाइसेंस निर्गत करने की कार्ययोजना बनाकर काम किया जाएगा। वे खुद इस व्यवस्था को देखेंगे। वहीं, बंदर पकड़ने के अभियान पर नगर आयुक्त ने कहा कि यह शहर में चल रहा है। पार्षदों ने बोर्ड बैठक में गृहकर, जलकर व सीवरकर की कम वसूली का मामला भी उठाया। कहा कि अधिकारियों की लापरवाही का नतीजा है कि इस बार भी कम वसूली हुई है।

माइक को लेकर फिर फजीहत

नगर निगम बोर्ड बैठक में एक बार फिर खराब माइक को लेकर पार्षद आक्रोशित हो गए। पार्षदों ने अधिकारियों से यहां तक कह दिया कि जब सदन के माइक ठीक नहीं कर सकते तो शहर का विकास क्या करेंगे।

दो गज की दूरी भूल गए पार्षद

तिलकहाल में कोरोना संक्रमण के प्रोटोकाल का पालन संभव नहीं हो सका। दो गज की दूरी नहीं दिखी। कुछ पार्षद बिना मास्क लगाए ही बैठक में मौजूद रहे। बैठक में प्रवेश के पहले थर्मल स्कैनिंग की व्यवस्था भी खानापूरी तक रही। महापौर ने कहा कि तिलकहाल में जगह कम थी इसलिए अव्यवस्था हो गई।

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