[प्रदीप द्विवेदी] मेरठ। डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर भी कोरोना से प्रभावित हो रहा था, लेकिन काम जारी रखने के लिए तरीका निकाला गया बायो बबल का। कारिडोर में लगे कर्मचारी व इंजीनियरों का बायो बबल बना दिया गया है।  इस दौरान इनका समान्‍य परीक्षण रोजाना किया जाता है। 

222 किमी के हिस्से का निर्माण एल एंड टी कंपनी करा रही है। शुरुआत में कंपनी के करीब 35 कर्मी संक्रमित हुए। कंपनी ने आइपीएल के प्रयोग को देखते हुए सभी कर्मचारियों के लिए बायो बबल बना दिया। अब प्रत्येक खंड का कार्य बायो बबल से हो रहा है। इससे कार्य तेजी से नहीं हो पा रहा है लेकिन संक्रमण फैलने की आशंका कम हो गई है। कंपनी के प्रोजेक्ट एडमिन हेड डा. रमन चौधरी ने बताया कि बायो बबल का पालन हो रहा है। जरूरत के सामान भी चुनिंदा लोग लाते हैं और उनका समय-समय पर परीक्षण होता है। बुखार, खांसी, आक्सीजन स्तर जो परीक्षण साइट पर हो सकता है उसका इंतजाम बायो बबल के साथ ही सभी कार्यालय में किया गया है।

यह होता है बायो बबल : जिसकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आती है और समान कार्य होता है तो उस तरह के चार-पांच कर्मियों की एक-एक टीम बना दी जाती है। सभी एक ही वाहन से आते और जाते हैं। एक ही कक्ष में रुकते हैं और वहीं पर भोजन करते हैं। वहीं से आते-जाते हैं। दूसरी टीम के संपर्क में नहीं आते। दूसरी टीम से मिलकर नहीं बल्कि फोन से बात करते हैं। गाइडलाइन का पालन करते हैं। उन्हें कहीं भी आने-जाने की मनाही है। जरूरत का सामान उन्हें एक खास टीम मुहैया कराती है। जो टीम बाजार जाती है उसको ज्यादा सावधानी बरतनी होती है। बायो बबल से आसपास व बाहर की दुनिया से संपर्क खत्म करके एक निश्चित वातावरण में आइसोलेशन की तरह रहते है।

डायवर्जन प्‍लान खिसका

रैपिड रेल के कार्य की वजह से दिल्ली रोड पर ट्रांसपोर्ट नगर से पांच मई के बाद डायवर्जन की योजना थी लेकिन अब फिलहाल इसे टाल दिया गया है। कार्यदायी कंपनी के कई इंजीनियर व श्रमिक चपेट कोरोना की चपेट में आ गए हैं। कुछ इंजीनियर व श्रमिक घर चले गए हैं। ऐसे में दिल्ली रोड पर ट्रांसपोर्ट नगर से होने वाला डायवर्जन फिलहाल टल गया है। 

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