मेरठ, जेएनएन। कचरे से बिजली बनाने की प्रक्रिया एक कदम और बढ़ गई है। अनुबंध के अनुसार कंपनी ने नगर निगम के गांवड़ी कचरा प्लांट से आरडीएफ (प्लास्टिक-पॉलीथिन कचरा) लेना शुरू कर दिया है। कंपनी आरडीएफ के पैलेट (छोटे गुटके) तैयार करेगी। ताकि बिजली संयंत्र चालू होने पर कच्चे माल की कमी न आने पाए।

भूड़बराल स्थित कचरे से बिजली बनाने के संयंत्र में नगर निगम अपने संसाधनों से गांवड़ी कचरा निस्तारण प्लांट से आरडीएफ (प्लास्टिक-पॉलीथिन कचरा) भेज रहा है। आरडीएफ एकत्र होने पर ब्रिजेंद्रा एनर्जी एंड रिसर्च कंपनी पैलेट बनाने का काम शुरू करेगी। पैलेट काफी मात्र में तैयार किया जाएगा। प्रतिदिन 30 टन आरडीएफ की खपत बिजली बनाने में की जानी है। इसके हिसाब से आरडीएफ की उपलब्धता पहले से सुनिश्चित करनी है। जैसे ही बिजली संयंत्र को ट्रांसमिशन से जोड़ा जाएगा तो विद्युत उत्पादन के लिए तैयार पैलेट का इस्तेमाल किया जाएगा। आरडीएफ जिसमें प्लास्टिक पॉलीथिन और ज्वलनशील कचरा होता है। इस कचरे को उच्च दाब पर कंप्रेस करके पैलेट बनाई जाती है। खुले कचरे की तुलना में पैलेट बेहद कम जगह में रखी जा सकती हैं और ठोस होने के कारण हवा में नहीं फैलती। कंपनी जो आरडीएफ नगर निगम से ले रही है, इसके एवज में नगर निगम को प्रति किलो आरडीएफ पर 50 पैसे के हिसाब से भुगतान होगा। अनुबंध के मुताबिक नगर निगम को 200 टन आरडीएफ कंपनी को देना है। सहायक नगर आयुक्त ने बताया कि गांवड़ी में आरडीएफ बड़ी मात्र में छांट लिया गया है। पीवीवीएनएल से कंपनी एक मेगावाट बिजली बनाने का अनुबंध भी कर लिया है। इलेक्टिसिटी रेगुलेटरी कमीशन से अनुमति मिलने का इंतजार है।

Posted By: Prem Bhatt

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