मेरठ, जेएनएन। मेरठ छावनी परिषद के निर्वाचित सदस्यों का छह महीने बढ़ा हुआ कार्यकाल 12 जनवरी को पूरा हो रहा है। अब सदस्यों का कार्यकाल बढ़ेगा या फिर चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी, इसे लेकर सदस्यों में असमंजस बना हुआ है। हालांकि नवंबर के आखिर तक रक्षा मंत्रालय इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट कर देगा।

मेरठ छावनी की करीब एक लाख से अधिक आबादी है। आठ वार्ड में बंटे छावनी के निर्वाचित सदस्यों के पांच साल का कार्यकाल 13 जुलाई 2020 को ही पूरा हो गया था। कोविड और प्रस्तावित छावनी अधिनियम 2020 को ध्यान में रखते हुए सदस्यों का कार्यकाल छह महीने बढ़ा दिया गया है। देश में 62 छावनियों में करीब 56 छावनियों के पांच साल का कार्यकाल जनवरी में पूरा हो रहा है। जिन छावनियों में छह महीने का कार्यकाल बढ़ाया गया था, वहां भी बढ़ी अवधि जनवरी में पूरी हो जाएगी। ऐसे में छावनी में चुनाव की संभावना भी बन सकती है। हालांकि अभी छावनी अधिनियम 2020 पर संसद की मुहर नहीं लगी है। उम्मीद है कि इस शीतकालीन सत्र में इस अधिनियम को संसद में रखा जाए। छावनी परिषद के सदस्य इन दोनों स्थितियों पर नजर रखे हैं। ज्यादातर सदस्य यह मानकर चल रहे हैं कि दिसंबर में एक बार फिर छह महीने का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है। उपाध्यक्ष विपिन सोढ़ी का कहना है कि कार्यकाल बढ़ने के आसार अधिक हैं।

मतदाता सूची है तैयार : छावनी परिषद का पिछला चुनाव वर्ष 2015 में हुआ था। उस समय 63 हजार मतदाता थे। इस बार बनी सूची में मतदाताओं की संख्या आधी करीब 31 हजार रह गई है। इसमें सेना के मतदाता 1358 हैं। ऐसे में अगर चुनाव की अधिसूचना भी जारी होती है तो कैंट बोर्ड की तैयारी है।

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