मेरठ, जागरण संवाददाता। Durga Puja 2022 नवरात्र और दुर्गा पूजा का मन में भाव आते ही आंखों के सामने बंगाल की दुर्गा पूजा का भव्य और विशाल दृश्य आंखों के सामने स्पष्ट हो जाता है। शहर में कुछ ऐसे प्रमुख स्थान भी है, जहां बंगाली परिवार उसी मनोभावना और विधि विधान से दुर्गा पूजा करते हैं और लाखों की संख्या में श्रद्धालु महिषासुरमर्दिनी के दर्शन करने और आशीर्वाद लेने दूर दूर से आते हैं।

पहली बार समिति की अध्‍यक्ष महिला

शहर में बंगाली रीति-रिवाज से दुर्गा पूजा का इतिहास लगभग 216 पुराना है। सदर दुर्गाबाड़ी के आसपास रहने वाले दो चार बंगाली परिवारों ने यहां दुर्गा पूजा की शुरुआत की, और 96 साल पहले बंगाली दुर्गाबाड़ी समिति गठन किया गया। सदर दुर्गाबाड़ी की दुर्गा पूजा इस बार इसलिए भी खास है कि 216 साल में पहली बार समिति की अध्यक्ष पद पर एक महिला हैं।

कई आयोजन होंगे

अध्यक्ष पापिया सान्याल का कहना है कि दुर्गाबाड़ी भी आज भी 216 पुरानी परंपरा निभाते हुए मां की मूर्ति बनाने के लिए बंगाल से कारीगर आते हैं। साज सज्जा के लिए भी बंगाल से ही सामग्री मंगवाई जाती है, और पूजन के लिए पंडित भी वहीं से आते हैं। इस बार देवी पूजन के साथ ही अन्य गतिविधियां और प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा।

दुर्गा पूजा में बंगाल का आर्केस्ट्रा

मुकंदी देवी धर्मशाला घंटाघर पर पिछले 27 सालों से दुर्गा पूजा हो रही है। जिसकी शुरुआत सराफा बाजार में बंगाली कारीगरों ने की। मेरठ सार्वजननीन दुर्गा पूजा सोसायटी के अध्यक्ष मनोज मंडल ने बताया कि इस बार दुर्गा पूजा में बंगाल का आर्केस्ट्रा खास आकर्षण का केंद्र रहेगा। इसमें वहीं के कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। इसके अलावा भंडारा भजन संध्या, सिंदूद खेला, शोभा यात्रा और मूर्ति विसर्जन किया जाएगा। दुर्गा पूजा में पहली बार बंगाल का आर्केस्ट्रा मंगवाया गया है। इसलिए भी इस साल की दुर्गा पूजा खास है।

नवरात्र पर बन रहा है शुभ संयोग और कलश स्थापना

आदि शक्ति भवानी मां दुर्गा का पर्व शारदीय नवरात्र 26 सितंबर से आरंभ हो रहे हैं और 5 अक्टूबर को समाप्त होंगे। नवरात्र में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा उपासना और व्रत किए जाते हैं। शास्त्रों में चार नवरात्र में चैत्र और शारदीय नवरात्र का विशेष महत्व है। शक्ति की उपासना का त्योहार शारदीय नवरात्र पर इस बार दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस बार शारदीय नवरात्र की शुरुआत शुक्ल और ब्रह्म योग से होगी।

इस बार बन रहा ब्रह्म योग

26 सितंबर को सुबह 8.06 बजे से ब्रह्म योग बन रहा है, जो 27 सितंबर को सुबह 6.44 बजे तक रहेगा। साथ ही शुक्ल योग की शुरुआत 25 सितंबर को सुबह 9.06 बजे से होगी और अगले दिन 26 सितंबर को सुबह 8.06 बजे तक रहेगा। सूरजकुंड स्थित बाबा मनोहरनाथ मंदिर की महामंडलेश्वर नीलिमानंद महाराज ने बताया कि इस बार नवरात्र सोमवार को शुरू होने के कारण माता का वाहन हाथी होगा, और उनकी विदाई भी हाथी पर होगी। हाथी को बुद्धि, ज्ञान और समृद्धि का   प्रतीक माना जाता है। ऐसे में इस बार शारदीय नवरात्र को सुख शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जा रहा है।

नवरात्र मुहूर्त

घट स्थापना 26 सितंबर सुबह 6.20 बजे से 10.19 बजे तक अश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा 26 सितंबर देर रात 3.24 बजे से आरंभअश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा समापन 27 सितंबर देर रात 3.08 बजे।  

Edited By: PREM DUTT BHATT