मेरठ। चिकित्सा विज्ञान में मेरठ के होनहार डाक्टर ने नया अध्याय जोड़ दिया है। 38 साल के डा. अंकित भरत ने दुनिया में पहली बार यूएसए के शिकागो में एक मरीज के फेफड़े की लंग्स वोल्यूम रिडक्शन सर्जरी कर उसे जीवनदान दिया। क्रानिक आब्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) बिगड़ने से मरीज सांस नहीं ले पा रहा था। यूएसए के प्रतिष्ठित टाइम्स स्क्वायर में डाक्टर की फोटो और उपलब्धियां देख भारतीय गर्व से भर गए।

फोड़ दिया फेफड़े का गुब्बारा

मेरठ के वरिष्ठ चिकित्सक डा. भरत गुप्ता के पुत्र डा. अकित गुप्ता शिकागो के नार्थ वेस्टर्न मेमोरियल हेल्थकेयर में लंग्स ट्रांसप्लांट सर्जन हैं। उन्होंने सीओपीडी, यानी इम्फेसीमा (इसमें फेफड़ों की लोच खत्म हो जाती है, और सांस तेजी से फूलता है) के मरीज का रोबोटिक तगगकनीक से अत्यंत जटिल आपरेशन किया। लंग्स ट्रासप्लांट भी दुनिया के चुनिंदा केंद्रों में होता है। डा. अंकित ने मरीज की छाती में दायीं ओर से तीन सूक्ष्म छेद कर रोबोटिक सर्जरी की और बीमार टिश्यू को सफलतापूर्वक हटाकर उसे जीवनदान दिया।

उच्च प्रशिक्षित चिकित्सकों की टीम के बीच डा. अंकित ने दस फुट दूर बैठकर रिमोट से रोबोट को नियंत्रित किया। इस पर थ्री-डी कैमरे से नजर रखी गई।

क्या है इम्फेसीमा बीमारी

डा. अंकित ने बताया कि यूएसए में 16 मिलियन लोगों को सीओपीडी है। इस बीमारी में आगे चलकर फेफड़ा गुब्बारे की तरह फूल जाता है। इसके फूटने पर मरीज की जान भी जा सकती है। फेफड़े फैल जाने से इनका सिकुड़ना-फूलना बंद हो जाता है। चेंबर में पर्याप्त आक्सीजन नहीं पहुंचती। इससे मरीज को अत्यधिक कष्ट होता है।

डा. आरके एरन ने बताया कि ज्यादा धूमपान व सघन वायु प्रदूषण से फेफड़े फैल जाते हैं। इसका लोच खत्म होने से मरीज का सांस लेना मुश्किल हो जाता है। डा. अंकित भरत ने हैरतअंगेज उपलब्धि हासिल की है। मरीज इम्फेसीमा के एडवांस स्टेज में था, जिसमें सांस लेना बेहद मुश्किल होता है। दुनिया की पहली रोबोटिक सर्जरी कर इस युवक ने देश और मेरठ का मान दुनियाभर में बढ़ाया है। टाइम्स स्क्वायर्स में चमकना बड़े स्टारों का सपना रहा है, जहां डा. भरत छा गए।

डा. राजीव अग्रवाल, वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट

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