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डायबिटीज मरीजों के लिए खुशखबरी: हाथ पर लगा सेंसर बताएगा शुगर लेवल, सुई चुभोकर जांचने की जरूरत नहीं

Published: Sat, 10 Oct 2026 06:50 PM (GMT+05:30)

डायबिटीज मरीजों के लिए कंटीन्यूअस ग्लूकोज निगरानी (सीजीएम) तकनीक एक नई उम्मीद लेकर आई है, जिसमें हाथ पर लगा वायरलेस सेंसर 15 दिनों तक शुगर स्तर की निगरानी करेगा।

इस तरह से मरीज के हाथ में लगा सेंसर डिवाइस पर मोबाइल एप से स्कैन करते ही आ जाता है शुगर लेवल। सौ. स्वयं

इस तरह से मरीज के हाथ में लगा सेंसर डिवाइस पर मोबाइल एप से स्कैन करते ही आ जाता है शुगर लेवल। सौ. स्वयं

HighLights

  1. हाथ पर लगा वायरलेस सेंसर 15 दिन शुगर ट्रैक करेगा।

  2. खतरे के निशान पर अलार्म बजाकर तुरंत सचेत करेगा।

  3. सुई चुभोने की जरूरत नहीं, दर्द से मिलेगी राहत।

दिलीप पटेल, मेरठ। डायबिटीज के मरीजों को अब बार-बार सुई चुभोकर शुगर जांचने की जरूरत नहीं होगी। कंटीन्यूअस ग्लूकोज निगरानी (सीजीएम) तकनीक में हाथ के पीछे लगाए जाने वाले छोटे वायरलेस सेंसर से 15 दिनों तक शुगर का डेटा अपने आप दर्ज किया जा सकता है। रात में सोते समय ग्लूकोज का स्तर खतरे के निशान से ऊपर या नीचे जाने पर सेंसर अलार्म बजाकर सचेत कर देगा।

विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार, सिक्के के आकार की इस डिवाइस की कीमत 4000 से 5000 रुपये तक है। सेंसर हर पांच मिनट में शरीर का ग्लूकोज स्तर दर्ज करता है। यह खान-पान, व्यायाम, दवाओं और इंसुलिन से जुड़ी जानकारी भी रिकॉर्ड रखता है।

इससे मरीज, डाक्टर और तीमारदार जान सकते हैं कि दिन या रात में किस समय शुगर बढ़ या घट रही है और दवाओं का क्या असर हो रहा है। यह तकनीक टाइप-एक डायबिटीज से पीड़ित और बार-बार लो-शुगर का सामना करने वाले मरीजों के लिए अधिक कारगर है। गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज के गंभीर मामलों में भी यह उपयोगी है।

सेंसर मोबाइल एप से जुड़ा होता है। शुगर घटने पर अलार्म बजता है और मरीज का रिकॉर्ड डाक्टर तथा तीमारदार के मोबाइल पर भी पहुंच जाता है। इससे हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा कम करने में मदद मिलती है। डिवाइस वाटरप्रूफ है और काम करते समय भी इसका उपयोग किया जा सकता है।

चिकित्सकों ने कहा

उनके पास आने वाले कई मरीज इस डिवाइस का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह 15 दिन तक चलती है, जिसके बाद दूसरी डिवाइस लगानी होती है। बार-बार सुई चुभोकर जांचने के दर्द से राहत मिलती है। घर में अकेले रहने वाले मरीजों का शुगर स्तर खतरे के निशान से ऊपर-नीचे होने पर भी यह अलर्ट करती है।

-डाॅ. अमित रस्तोगी, एंडोक्रिनोलाजिस्ट।

डिजिटल सेंसर से मरीजों को अपने शुगर स्तर के पैटर्न की जानकारी मिलती है। इसके इस्तेमाल से मरीज तीन से चार प्रतिशत ज्यादा बेहतर निगरानी कर पाते हैं। जिन मरीजों की सर्जरी होनी होती है, उनके लिए शुगर नियंत्रित करना भी आसान हो जाता है।

-डाॅ. तनुराज सिरोही,वरिष्ठ फिजिशियन।