[ओम बाजपेयी], मेरठ। धन्नीपुर मस्जिद के माध्यम से मौसम परिवर्तन के दुष्प्रभावों के प्रति सावधान करते हुए दुनिया को एक संदेश देने का प्रयास किया जाएगा। मस्जिद के आसपास की हरित पट्टी भी अनूठी होगी। यहां विश्व और भारत के विभिन्न भागों से उन पेड़ों की किस्में लगाई जाएंगी जो प्रदूषण रोकने में कारगर हैं और अयोध्या के वातावरण में उग सकते हैं। यह पौधे दक्षिण अफ्रीका, आस्ट्रेलिया और अमेजान के जंगल, पूवरेत्तर भारत, कश्मीर समेत अन्य जगहों से एकत्र किए जाएंगे। प्रदेश सरकार ने इसके लिए पांच एकड़ भूमि आवंटित की है।

अयोध्या के धन्नीपुर में मस्जिद का निर्माण इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन द्वारा किया जाना है। इसके ट्रस्टी और कोषाध्यक्ष मेरठ निवासी फाइज आफताब ने बताया कि मस्जिद निर्माण में इस बात पर जोर दिया जाएगा कि सौर ऊर्जा का अधिक से अधिक प्रयोग किया जाए। मस्जिद के गुंबद में सोलर पैनल लगे होंगे। मस्जिद को 100 प्रतिशत जीरो एनर्जी अर्थात सोलर ऊर्जा से संचालित किया जाएगा। बाहरी इलेक्ट्रिसिटी का प्रयोग कम से कम हो। इसी तरह अस्पताल की बाहर जो कांच दीवारें होंगी वह सोलर पैनल का काम करेंगी। मस्जिद में दो मीनारें होगीं। ऊपरी और निचले भूतल में नमाज पढ़ने की सुविधा होगी। गुंबद इस तरह का बनाया जाएगा कि सूर्य का प्रकाश न सिर्फ ऊपरी भूतल को बल्कि निचले तल को भी प्रकाशित करेगा। महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग वजूखाना और नमाज पढ़ने का स्थान होगा।

प्रस्तावित मस्जिद का वीडियो जारी

धन्नीपुर में बनने वाली मस्जिद और अस्पताल का वीडियो जारी किया गया है। मस्जिद विशाल प्यालेनुमा गोलाकार नजर आ रही है। अस्पताल की इमारत नाव की तरह है। इसका डिजायन इस तरह से है कि सूर्य का अधिकतम प्रकाश इसकी दीवारों पर लगे सोलर पैनल पड़े। इसी तरह मस्जिद में दो मीनारें इसे पूरी तरह पारंपरिक मस्जिदों से अलग लुक प्रदान करती हैं। यह मीनारें सीधी न होकर कर्व लिए हुए हैं और आसमान को छूती प्रतीत होती हैं। 1.46 मिनट के इस वीडियो में पार्किंग और चारों ओर हरा-भरा क्षेत्र दर्शाया गया है। 

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