जागरण संवाददाता, मेरठ :

डीजीपी ओपी सिंह शनिवार सुबह 10.30 बजे पुलिस लाइन पहुंचे और सभी एसएसपी से परिचय लिया। वह मुजफ्फरनगर एसएसपी अनंतदेव तिवारी से बात कर रहे थे, इसी बीच एक युवक सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए उनके पैरों में गिर गया। सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़ा लेकिन डीजीपी ने उसकी समस्या सुनी। उसने डीजीपी से नौकरी की मांग की। डीजीपी ने नौकरी का आश्वासन भी दिया। बाद में उसे बिना नाम व पता पूछे ही पुलिस लाइन से बाहर कर दिया।

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सपा प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिले डीजीपी

भले ही डीजीपी ने जिला प्रतिनिधियों की बात सुनने के लिए अफसरों को सीख दी हो, लेकिन वह खुद शहर विधायक रफीक अंसारी से नहीं मिले। जब डीजी मेरठ से दिल्ली के लिए निकलने लगे तो सपा के जिलाध्यक्ष और विधायक उनकी गाड़ी के पास पहुंचे। खिड़की खटखटाते रहे। इस बीच अन्य अफसर भी वहां मौजूद थे, लेकिन डीजी का काफिला आगे बढ़ गया। इसके बाद सपा प्रतिनिधियों ने मेरठ एडीजी को ज्ञापन दिया। असमें बताया कि पांच फरवरी को पुलिस ने झूठे मुकदमे में इबने, शोएब, मोइन, वसीम, जाहिद, अल्ताफ, जावेद को जेल भेज दिया। हस्तिनापुर के किसान दंपती की हत्या, नवीन मंडी में प्रधान की हत्या, लिसाड़ी गेट में पूर्व पार्षद की हत्या, कोतवाली में दोहरा हत्याकांड आदि वारदातों का पर्दाफाश न करने का आरोप लगाया। मिलने वालों में जिलाध्यक्ष चौधरी राजपाल सिंह रफीक अंसारी आदि शामिल रहे।

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Posted By: Jagran