मेरठ, जागरण संवाददाता। नवंबर महीने का अंत आते-आते डेंगू के नए मामले आने का सिलसिला भी धीमा पड़ गया है। सोमवार को जिले में डेंगू के महज दो नए मरीज मिले हैं। वहीं, दोनों ही मरीज ग्रामीण इलाकों में मिले हैं। हालांकि अभी सावधानी बरतने में कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए।

इन इलाकों में मिले मरीज

मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डा. अशोक तालियान ने बताया कि अब तक जिले में शहरी क्षेत्र में डेंगू के 873 व ग्रामीण क्षेत्रों में 759 मरीज मिल चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्र में मिले दो नए मरीजों में एक मरीज जानी और एक मरीज सरूरपुर में मिला है। जिले में अब तक सर्वाधिक 122 मरीज मलियाना और इसके बाद 121 कंकरखेड़ा में मिले हैं। ग्रामीण इलाकों में रोहटा में सर्वाधिक 99, दौराला में 96 मिले हैं। वहीं, बताया कि अब जिले में डेंगू के 98 एक्टिव मरीज हैं। इनमें 19 मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं और 79 घर पर रहकर इलाज करा रहे हैं। अब तक 1534 रिकवर हो चुके हैं।

4422 सैंपलों की जांच में कोई संक्रमित नहीं

मेरठ जिले में सोमवार को 4422 सैंपलों की जांच में कोई कोरोना संक्रमित नहीं मिला। सीएमओ डा. अखिलेश मोहन ने बताया कि अब जिले में कोरोना से ग्रसित दो सक्रिय मरीज हैं। दोनों घर पर रहकर इलाज करा रहे हैं।

सरधना के छुर गांव के सैनिक की पुणे में डेंगू से मौत

सरधना : छुर गांव के सैनिक की बीते शनिवार को पुणे के आर्मी अस्पताल में डेंगू से मौत हो गई। सोमवार को उनका पार्थिंव शरीर सैन्य सम्मान के साथ गांव लाया गया, जहां अंतिम सलामी देने के बाद अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान ग्रामीणों की आंखें नम थीं और परिवार में मातम पसर गया। छुर निवासी ब्रह्मपाल ने बताया कि उनका बेटा सनी तालियान नासिक के अहमदनगर में 17 पुणे हार्स में लांस दफेदार पद पर तैनात थे। कुछ दिन पहले वह छुट्टी पर घर आए थे। इसके बाद अहमदनगर अपनी बटालियन में चले गए थे, लेकिन कुछ दिन बाद वह बीमार हो गए। वहां डेंगू की पुष्टि होने के बाद पुणे के आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया गया। बताया कि प्लेटलेट्स लगातार गिरती चली गईं और बीते शनिवार को उनकी मौत हो गई। उनका पार्थिंव शरीर दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचा। वहां से छुर गांव लाया गया। जानकारी मिलने पर आसपास के ग्रामीण भी गांव में एकत्र हो गए। श्मशानघाट में सलामी देने के बाद बेटे अभिराज ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान मेरठ से भी कैप्टन, नायब सूबेदार, हवलदार समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।

चार भाइयों में सबसे छोटे थे सनी

सनी चार भाइयों में सबसे छोटे थे। वे अपने पीछे पत्नी दीपा व चार वर्ष के बेटे अभिराज को छोड़ गए हैं। उधर, दिनभर परिवार को ढांढस बंधाने वालों का तांता लगा रहा। रालोद नेता संजय चौधरी भी पहुंचे औैर सैनिक के स्वजन को सांत्वना दी। स्वजन ने बताया कि सनी करीब 11 वर्ष पहले सेना में भर्ती हुए थे। पहली तैनाती मेरठ में हुई थी।

Edited By: Prem Dutt Bhatt