मेरठ, (प्रदीप द्विवेदी)। Delhi Meerut Rapid Rail: देश की पहली रीजनल रैपिड रेल को मुनाफे में रखने के लिए उच्च आय वर्ग, बिजनेसमैन, उच्च वेतन वाले पेशेवरों को दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कारिडोर के किनारे ही आवास, शिक्षा, चिकित्सा व खानपान की सुविधा देने की योजना है, ताकि ऐसे लोग इस कारिडोर के नजदीक रहें या रुकें और रैपिड रेल से यात्रा करें। दिल्ली, नोएडा व गुरुग्राम के पेशेवरों को भी यहां पर सस्ते आवास देने की योजना बन रही है, लेकिन इस कारिडोर के किनारे कहीं भी नई कालोनी विकसित करने के लिए जगह नहीं है। ऐसे में सरकारी कालोनियों को ही रियल एस्टेट मोनेटाइजेशन के तहत निजी कंपनियों को पूरी तरह से या फिर खाली प्लाट वाले हिस्से को दिया जा सकता है, ताकि इन कालोनियों में उन्नत सुविधाएं दी जा सकें।

भारत सरकार के नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन के तहत दिल्ली रोड व रुड़की रोड पर विकसित की गईं सरकारी कालोनियों को निजी हाथों में दिया जा सकता है। नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन में रियल एस्टेट मोनेटाइजेशन का भी प्रविधान किया गया है। वहीं, रैपिड रेल कारिडोर के लिए राजस्व एकत्र करने की वैल्यू कैप्चर फाइनेंसिंग योजना में भी यह उल्लेख है कि प्राइवेट प्लेयर्स को सरकारी संपत्तियों को देकर आय बढ़ाई जाएगी। यही नहीं, रैपिड रेल संचालन में राजस्व बढ़ोतरी के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक के तहत जो पैनल बनाया गया है, उसमें रियल एस्टेट मोनेटाइजेशन के विशेषज्ञ भी शामिल हैं। इन सबसे यह पूरी तरह से संभावित है कि आने वाले समय में सरकारी क्षेत्र की कालोनियां निजी कंपनियों की देखरेख में जा सकती हैं।

रियल एस्टेट मोनेटाइजेशन से सुधरेंगी कालोनियां

प्राधिकरण द्वारा विकसित की गई कालोनियों का रखरखाव ठीक से नहीं हो पा रहा है। निवासी शुल्क देने से कतराते हैं। करोड़ों खर्च के बावजूद स्थिति बदहाल है। प्लाट लेने के बाद भी घर नहीं बन रहे हैं। तमाम सुविधाओं का अभाव है। इसलिए उसके प्रति दूसरे शहरों के लोग आकर्षित नहीं हो रहे हैं। घाटे में चल रही इन आवासीय योजनाओं को निजी कंपनियां विकसित करेंगी। वे ही मेंटीनेंस देखेंगी और शुल्क वसूली करेंगी। वे ही अपने हिसाब से नई प्लाटिंग करेंगी और उसमें फ्लैट या विला बनाकर देंगी। लाभ में से कुछ हिस्सा प्राधिकरणों को मिलेगा और कुछ हिस्सा रैपिड रेल संचालन के लिए जाएगा।

Edited By: Himanshu Dwivedi

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