मेरठ, जेएनएन। मेडिकल कालेज की एक नर्स तबीयत खराब होने पर कोविड जांच के लिए गुहार लगाती रही, फिर भी उससे डयूटी कराई गई। तीन बार जांच कराने पर जानबूझकर उसकी रिपोर्ट दबाई गई। सोमवार को नर्स ने चुपचाप दौराला पहुंचकर जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। नर्स ने अपनी किडनी की बीमारी का हवाला देते हुए मेडिकल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि उसे लंबे समय से कोरोना के लक्षण हैं, किंतु रिपोर्ट निगेटिव बताकर डयूटी कराते रहे। नर्स ने माइक्रोबायोलोजी विभाग के तकरीबन सभी स्टाफ को संक्रमित बताया है।

मेडिकल कालेज की 35 साल की नर्स ने पांच से 18 जून तक कोविड वार्ड में डयूटी की। 19 जून को जांच कराई तो रिपोर्ट निगेटिव मिली, किंतु नर्स के गले में खराश बनी हुई थी। 26 जून को फिर से जांच कराया। इस बार लैब ने रिपोर्ट को पॉजिटिव और निगेटिव न बताकर रिपीट बता दिया। नर्स ने रिपीट का मतलब जानने के लिए माइक्रोबायोलोजी लैब में फोन किया, जहां किसी ने बताया कि यह 99 फीसद पॉजिटिव होने के संकेत हैं। घबराई नर्स रात को गायनी विभाग में ट्रू नाट से जांच कराने गई, जहां उसे सीएमओ की अनुमति के बिना जांच से मना कर दिया गया। 28 जून को मेडिकल की ओपीडी पहुंचकर उसने फिर से जांच कराया, जहां रिपोर्ट निगेटिव आई। विभागीय अधिकारियों ने ड्यूटी पर आने का दबाव बनाया। इधर, खांसी और सांस की तकलीफ को देखते हुए नर्स ने दौराला सीएचसी पहुंचकर जांच कराई, जहां रिपोर्ट पॉजिटिव आई। अब नर्स ने मेडिकल प्रशासन पर संक्रमण फैलाने और लैब के कई संक्रमितों की रिपोर्ट छुपाने का आरोप लगाया है। इधर, सीएमएस डा. धीरज राज ने कहा कि जांच और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया पारदर्शी और सरल है, जिसमें कोई चूक नहीं हो सकती। 

Posted By: Taruna Tayal

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