मेरठ, जेएनएन। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे का प्रोजेक्ट पिछड़ जाएगा। किसानों के नए तरह के आंदोलन व धीमे कार्य की वजह से नई समय सीमा मार्च-2020 तक मेरठ से डासना तक का सफर किसी भी सूरत में शुरू नहीं हो पाएगा। जहां भी थोड़ा बहुत काम बारिश के बाद अब शुरू हुआ था, वहां भी किसानों ने रुकवा दिया है। मेरठ व गाजियाबाद की गिनी-चुनी साइट को छोड़कर कहीं भी काम नहीं हो पा रहा है। पहले से ही पिछड़े हुए प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए कुछ माह पहले समय सीमा निर्धारित की गई थी कि मार्च-2020 तक डासना से मेरठ तक एक्सप्रेस-वे शुरू कर दिया जाएगा।

जगह-जगह रुका हुआ है काम

हाल ही में केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने जनवरी तक कार्य पूरा करने का दावा कर दिया था। जिस दिन केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की थी, यदि उसी दिन से तेज गति से काम किया जाता, तब भी जनवरी में उद्घाटन संभव नहीं हो पाता। खैर, समय सीमा मार्च की बात करें तो यह भी नामुमकिन है। गाजियाबाद जिले में जगह-जगह काम रुका हुआ है। किसान पहले अपने-अपने स्तर से मुआवजे की लड़ाई लड़ रहे थे। जिसका समझौता हो जाता था, वहां काम शुरू हो जाता था। लेकिन अब नया आंदोलन शुरू हो गया है। किसानों ने मांग रख दी है कि डासना से लेकर परतापुर तक एक समान दर से मुआवजा दिया जाए। एक्सप्रेस-वे के दोनों तरफ सर्विस लेन बनाई जाए। तलहटा में गोल चक्कर बनाया जाए और टोल में छूट दी जाए। इन मांगों को लेकर किसान मुरादाबाद गांव में आठ अक्टूबर से धरने पर बैठे हैं।

पंचायत में 19 गांवों के किसान

रविवार को 19 गांवों के किसान एकत्र हुए और पंचायत की। इसमें मेरठ जिले के काशी, अच्छरौंडा आदि गांवों के किसान भी शामिल हुए। गाजियाबाद जिले से मुरादाबाद, तलहटा, चुड़ियाला, बड़जल, गलहैता, सैदपुर, सोलाना, अमराला, धनीरपुर, महमदपुर, सुजानपुर अखाड़ा आदि गांवों के किसान थे। इनमें प्रमुख रूप से पूर्व प्रधान जैनुल, डा. मनवीर, श्रीचंद प्रधान, अमन सिंह, चरण सिंह, जयवीर सिंह आदि शामिल रहे।

ये हैं प्रमुख मांगें

डासना से परतापुर तक एक समान दर से मुआवजा दिया जाए

एक्सप्रेस-वे के दोनों तरफ सर्विस लेन बनाई जाए

तलहटा में गोल चक्कर बनाया जाए

टोल टैक्स में स्थानीय लोगों को छूट दी जाए

तो लग जाएगा और वक्‍त

2020 के अंत तक रखिए उम्मीद मुआवजे की वजह से जहां काम रुका हुआ है, वहां की दिक्कत तो है ही, लेकिन जहां की जमीन का विवाद नहीं है, वहां भी इतनी तेजी से काम नहीं हो रहा है कि तीन-चार माह में सब व्यवस्थित कर दिया जाएगा। मार्च तक लक्ष्य पूरा करने वाली कार्यशैली बिल्कुल भी दिखाई नहीं दे रही है। अगर मेरठ से लेकर डासना तक मुआवजा प्रकरण इस माह हल हो भी जाए तो भी वक्त लगेगा, क्योंकि डासना में 6.5 किमी की एलिवेटेड रोड बननी है। इसमें भी कम से कम 7-8 माह लगेंगे। ऐसे में अब उम्मीद यही की जानी चाहिए कि इस एक्सप्रेस-वे पर सफर का सपना साल 2020 के अंत तक पूरा हो पाएगा।

इनका कहना है

इस प्रोजेक्ट के लिए 1800 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जा चुका है। एक समान दर से मुआवजा नहीं दिया जा सकता, क्योंकि सभी की कीमतें अलग-अलग हैं। सर्विस लेन व टोल से छूट का एक्सप्रेस-वे के नियमों में प्रावधान नहीं है। किसी गांव को कनेक्टिविटी में दिक्कत न हो इसलिए 89 स्ट्रक्चर हैं। पानी निकासी के लिए 40 कलवर्ट हैं, 31 स्थानों पर बड़े पाइप डाले गए हैं। अभी भी किसानों से कहा गया है कि चकरोड आदि की लिस्ट दें, जिससे उन्हें नजदीकी अंडरपास से सड़क बनाकर जोड़ दिया जाए। धरना स्थल पर प्रशासन के अधिकारी गए थे। मैं भी गया था। नियमों को समझाने की कोशिश की जा रही है।

- अरविंद, प्रोजेक्ट मैनेजर, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे (एनएचएआइ)

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