मेरठ, जेएनएन। कोरोना वायरस जैसी वैश्विक महामारी से निपटने के लिए तीन माह से पूरे देश मे लाकडाउन की स्थिति है। जिसके चलते प्रदेश के सभी स्कूल बंद पडे हुए है । इस आपदा के कारण लोग बेरोजगार हो गए है उनके सामने रोजी रोटी का संकट गहरा रहा है। ऐसे में अभिभावकों को स्कूलों की फीस भरने में पसीने छूट रहे है और बच्चों के साथ यही गुहार लगाते दिख रहे है कि योगी जी स्कूलों की तीन माह की फीस माह करा दो।

लाकडाउन के चलते तीन माह से स्कूल बंद पड़े है। स्कूल संचालक आनलाइन क्लास के माध्यम से बच्चों को शिक्षा ग्रहण कराने की बात कहकर अपनी फीस पक्की कर रहे है। परंतु अधिकांश बच्चे ऐसे है जो आनलाइन क्लास लेने में ही समर्थ नहींं है। स्कूल संचालक बच्चों पर फीस का दबाव भी बनाने लगे है। जबकि लाकडाउन में अभिभावकों के भी रोजगार बंद हो गए है। रोजमर्रा के खर्चे भी भारी हो रहे है। ऐसे में स्कूली बच्चों के साथ अभिभावक भी आगे आए और उन्होंने प्रदेश सरकार से स्कूलों की तीन माह की फीस माह करने की गुहार लगाई। ऐसे में बच्चे योगी अंकल फीस माफ करो, हमारे अभिभावकों के रोजगार बंद है, उन पर दया करों जैसे स्लोगन लिखे पोस्टर भी हाथों में लिए थे। इसको लेकर अभिभावकों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को एक पत्र भी भेजा है। अब देखना यह है कि इन बच्चों की गूंज प्रदेश सरकार तक पहुंचती है या नही।

एडमिशन फीस व कोर्स ने दिलाए चक्कर

अभिभावक सुशील, सुभाष गबरानी, नागेंद्र, मुकेश ठाकुर, निशा वर्मा व समाजसेवी गौरव गुर्जर, हरविंदर छाबड़ा, बालमुकुंद बत्रा आदि का कहना है कि स्कूल की फीस के साथ साथ सरकार को स्कूलों की मनमानी एडमिशन फीस व किताबों के भारी भरकम दामों पर अंकुश लगाना चाहिए। स्कूल संचालक नियमों को दरकिनार करते हुए एनसीईआरटी की किताबें न लगाकर प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें लगाते है और स्वयं ही खरीदकर अभिभावकों को मनमाने रेट पर बिक्री करते है। इसकी एवज में वे मोटा कमीशन लेते है। परंतु अभिभावक बेचारा अपने बच्चों का भविष्य संवारने के लिए इन किताबों के भारी दामों के बोझ तले दबना पड़ता है।

Posted By: Taruna Tayal

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