ओम बाजपेयी, मेरठ। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह राजनेता ही नहीं थे बल्कि आमजन विशेष रूप से ग्रामीणों के सुख-दुख के साझीदार थे। उनके मन में ग्रामीण जन की दुश्वारियों के प्रति एक कसक थी। इसी कसक ने उन्हें राजनीतिज्ञ से कहीं बढ़कर एक उपदेशक, समाज सुधारक के रूप में स्थापित किया।

भारत छोड़ो आंदोलन के समय चरण सिंह ने बरेली जेल में लंबा समय काटा था। उसी दौरान उन्होंने 'शिष्टाचार' नामक पुस्तक लिखी थी। 1953 में इस पुस्तक की भूमिका में प्रदेश के मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत ने लिखा था ''जीवन में सुख और शांति लिए शिष्टाचार की उपयोगिता सदाचार से कम नहीं है। शिष्टाचार और अनुशासन के द्वारा वैयक्तिक और सामाजिक जीवन स्वस्थ्य और सुंदर बन सकेगा। इसी विचार से मेरे सहयोगी मित्र चरण सिंह जी ने इस पुस्तक को लिखने का प्रयास किया है।'' यह पुस्तक आम व्यक्ति विशेष रूप से नौजवानों के लिए के लिए गाइड बुक की तरह है। इस पुस्तक में आम जन को अपने व्यक्तिगत जीवन में कैसे आचार विचार रखने चाहिए इनका जिक्र है। यहां तक कि पति-पत्‍‌नी, ग्राहक-दुकानदार, कर्मचारी-अधिकारी, माता पिता और संतान के बीच कैसे संबंध होने चाहिए इनको बताया गया है। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की पारंपरिक छपरौली विधानसभा से पांच बार विधायक रहे चौधरी नरेंद्र सिंह ने बताया कि उनके सभाओं में दूर-दूर से लोगों की भीड़ जुटती थी। महिलाओं की संख्या खासी होती थी। भाषणों में राजनीति की बात नहीं होती थी, परिवार, समाज और देश में कैसे खुशहाली आए इस पर चर्चा करते थे। दहेज, नशाखोरी आदि प्रवृतियों पर वह चोट करते थे। एक संत की तरह वह प्रवचन करते थे। साफ-सफाई और ईमानदारी पर उनका खासा जोर रहता था।

कबीर और मनु का उदाहरण

चौधरी चरण सिंह के सक्रिय राजनीतिक काल के समय 1977 से 12 वर्षो तक मेरठ में जिलाध्यक्ष की कमान संभालने वाले चौधरी जगत सिंह ने बताया कि महर्षि दयानंद, महात्मागांधी और सरदार पटेल से वह प्रभावित थे। वेदों का उन्हें ज्ञान था। मनु, भतर्ृहरि के श्लोकों कबीर के दोहों का उदाहरण अक्सर देते रहते थे।

चौधरी चरण सिंह की शख्सियत से संबंधित महत्वपूर्ण बातें

- रौबीला व्यक्तित्व, चेहरे पर संजीदगी।

- उन्हें हंसते और मुस्कराते हुए देखना एक दुर्लभ अनुभव था।

- हाथ में एचएमटी की घड़ी बांधते और वह भी उल्टी।

- आवास पर वह जमीन पर बैठते थे। आगे लिखने वाली चौकी होती थी।

- फिल्मों में उन्हें केवल उपकार पसंद थी।

- अध्ययनशील इतने कि रात में तीन बजे उठकर पढ़ने लगते थे।

- अपने क्षेत्र के लोगों का नाम व उनकी परेशानी याद रखते थे।

Posted By: Jagran

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