CCSU : डिजिटल अरेस्ट से गेमिंग फ्रॉड तक... छात्रों को बताए साइबर ठगी से बचाव के तरीके
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में छात्रों के लिए साइबर सुरक्षा एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें डिजिटल अरेस्ट से ...और पढ़ें

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के लॉ डिपार्टमेंट में स्टूडेंट साइबर क्राइम पर जागरूकता अभियान के बारे में बतातीं साइबर क्राइम सीईओ सौम्या अस्थाना। जागरण
HighLights
सीसीएसयू में साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित।
डिजिटल अरेस्ट, गेमिंग फ्रॉड, फर्जी निवेश पर जानकारी दी।
साइबर ठगी होने पर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।
जागरण संवाददाता, मेरठ। पुलिस या सरकारी अधिकारी बनकर गिरफ्तारी का डर दिखाना, गेमिंग में बड़े इनाम का लालच देना और विदेश में नौकरी का झांसा देना सहित साइबर अपराधी ठगी के लिए लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। इनसे बचाव और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया बताने के लिए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) में गुरुवार को साइबर सुरक्षा एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
उत्तर प्रदेश पुलिस के साइबर जागरूकता अभियान के तहत विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट आफ लीगल स्टडीज (आइएलएस) और सर छोटूराम इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाजी ने यह कार्यक्रम आयोजित किया। पुलिस अधिकारियों ने डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग, आनलाइन गेमिंग फ्राड, साइबर स्लेवरी, इंटरनेट मीडिया ठगी और फर्जी निवेश योजनाओं के बारे में जानकारी दी।
उपनिरीक्षक नितिन पांडेय और आकाश कुमार ने बताया कि ठग पुलिस या सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर गिरफ्तारी का भय दिखाते हैं और जांच के नाम पर पैसे भेजने या बैंक की गोपनीय जानकारी देने का दबाव डालते हैं। ऐसी काल आने पर घबराने के बजाय संबंधित विभाग से स्वतंत्र रूप से पुष्टि करनी चाहिए। अनजान लिंक खोलने, संदिग्ध क्यूआर कोड स्कैन करने और अनधिकृत एप डाउनलोड करने से आर्थिक नुकसान हो सकता है। ओटीपी, यूपीआइ पिन, एटीएम कार्ड का सीवीवी नंबर और बैंकिंग पासवर्ड किसी से साझा न करने की सलाह दी।
सीओ सौम्या अस्थाना ने कहा कि विदेश में नौकरी और आकर्षक वेतन का लालच देकर लोगों को ऐसे नेटवर्क में फंसाया जा सकता है, जहां उनसे दबावपूर्वक आनलाइन ठगी जैसी अवैध गतिविधियां कराई जाती हैं। विद्यार्थियों से भर्ती एजेंसियों और विदेश भेजने के दावों की विश्वसनीयता जांचने को कहा। गेमिंग में मुफ्त क्वाइन, बोनस, इनाम या अकाउंट अनलाक करने के बहाने पैसे और गोपनीय जानकारी हासिल की जाती है। इसके लिए आधिकारिक स्रोतों से ही एप डाउनलोड करने और अकाउंट की जानकारी साझा न करने की सलाह दी।
उपनिरीक्षक निर्मल सती ने अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट, संदिग्ध समूहों और निजी तस्वीरों या दैनिक गतिविधियों को सार्वजनिक करने के जोखिम बताए। संदिग्ध प्रोफाइल, संदेश और लिंक से जुड़े डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने को भी कहा।
इंस्पेक्टर संजय पांडेय ने वित्तीय साइबर ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करने और www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की। शुरुआती समय में शिकायत से धनराशि के लेनदेन पर कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है। छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. भूपेंद्र सिंह ने फर्जी निवेश योजनाओं से सावधान किया। बताया कि ठग पहले छोटे निवेश पर लाभ दिखाकर भरोसा जीतते हैं, फिर बड़ी रकम लगाने के लिए प्रेरित करते हैं। कुलानुशासक प्रो. बीरपाल सिंह ने एआइ से बने भ्रामक वीडियो, आवाज की नकल और फर्जी प्रचार के प्रति सतर्क रहने और परिवार और समाज में जागरूकता फैलाने पर जोर दिया।
