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सीसीएसयू ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की पढ़ाई, क्रेडिट व्यवस्था और परीक्षा मूल्यांकन में बदलाव ...और पढ़ें

HighLights
विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल में नए एनईपी आर्डिनेंस को दी मंजूरी।
हर विषय में थ्योरी और प्रैक्टिकल सहित न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य ।
जागरण संवाददाता, मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के तहत स्नातक (यूजी) और स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों की पढ़ाई, क्रेडिट व्यवस्था और परीक्षा मूल्यांकन में बदलाव किया गया है।
नए प्रविधानों के तहत विद्यार्थियों का परिणाम केवल अंकों के आधार पर नहीं...बल्कि ग्रेड, ग्रेड प्वाइंट, सेमेस्टर ग्रेड प्वाइंट एवरेज (एसजीपीए) और क्यूम्युलेटिव ग्रेड प्वाइंट एवरेज (सीजीपीए) के आधार पर भी तैयार किया जाएगा।
वहीं पीजी पाठ्यक्रमों में मेजर विषयों पर फोकस बढ़ाते हुए चौथे सेमेस्टर में चार क्रेडिट का रिसर्च प्रोजेक्ट शामिल करने का प्रविधान किया गया है। यह व्यवस्था शैक्षणिक सत्र 2026-27 में प्रवेश लेने वाले पीजी विद्यार्थियों पर लागू होगी। पहले से पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के लिए पुरानी व्यवस्था ही रहेगी। विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल में नए एनईपी आर्डिनेंस को मंजूरी दिए जाने के बाद पाठ्यक्रमों की क्रेडिट संरचना में बदलाव का रास्ता साफ हुआ है।
नई व्यवस्था के अनुसार पीजी के पहले, दूसरे और तीसरे सेमेस्टर में 20-20 क्रेडिट के मेजर विषय ही होंगे। चौथे सेमेस्टर में भी 20 क्रेडिट के मेजर विषयों के साथ चार क्रेडिट का रिसर्च प्रोजेक्ट करना होगा।
इस तरह चौथे सेमेस्टर में विषयों की पढ़ाई के साथ शोध कार्य को भी महत्व दिया जाएगा। मौजूदा व्यवस्था में पीजी के प्रथम वर्ष में एक सेमेस्टर में माइनर विषय का प्रावधान था। इसके अलावा प्रथम और द्वितीय वर्ष में आठ-आठ क्रेडिट के प्रोजेक्ट की व्यवस्था थी।
इससे विद्यार्थियों को मुख्य विषय में गहराई से अध्ययन और शोध का अवसर मिलेगा। स्नातक के तीन वर्षीय पाठ्यक्रम में छह सेमेस्टर के दौरान कुल 120 क्रेडिट अर्जित करने का प्रविधान है। इसमें प्रथम सेमेस्टर में 23, दूसरे में 17, तीसरे में 23, चौथे में 17 और पांचवें और छठे सेमेस्टर में 20-20 क्रेडिट निर्धारित किए गए हैं।
मेजर और माइनर विषयों के साथ कौशल विकास और सह-पाठ्यक्रमों को भी पाठ्यक्रम संरचना का हिस्सा बनाया गया है। चौथे सेमेस्टर में चयनित दो मेजर विषयों में से किसी एक से संबंधित तीन क्रेडिट की शोध परियोजना का प्रविधान भी दिया गया है। इससे विद्यार्थियों को स्नातक स्तर पर ही शोध आधारित अध्ययन से जोड़ने की पहल की गई है।
बैक पेपर और डिग्री के लिए नियम
विद्यार्थियों को वर्तमान सेमेस्टर के परिणाम की परवाह किए बिना अगले सेमेस्टर में प्रमोट किया जा सकेगा। हालांकि, डिग्री प्राप्त करने के लिए सभी निर्धारित विषयों में उत्तीर्ण होना जरूरी रहेगा। बैक पेपर, प्रायोगिक परीक्षा और अंक सुधार के अवसर विश्वविद्यालय के निर्धारित नियमों के अनुसार मिलेंगे। स्नातक की डिग्री अधिकतम छह वर्ष में पूरी करनी होगी। एसजीपीए से एक सेमेस्टर के प्रदर्शन और सीजीपीए से सभी सेमेस्टरों के समग्र प्रदर्शन का आकलन होगा।
हर विषय में 33 प्रतिशत अंक पाना होगा अनिवार्य
यूजी परीक्षा एवं मूल्यांकन नियमों के अनुसार हर विषय में थ्योरी और प्रैक्टिकल सहित न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा। मेजर और माइनर विषयों में बाह्य परीक्षा के लिए 75 और आंतरिक मूल्यांकन के लिए 25 अंक निर्धारित हैं। बाह्य परीक्षा में कम से कम 25 और आंतरिक और बाह्य मूल्यांकन को मिलाकर कुल 33 अंक हासिल करने होंगे। निर्धारित न्यूनतम अंक नहीं मिलने पर विद्यार्थी को संबंधित विषय में अनुत्तीर्ण माना जाएगा।
