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CBSE ने 'वीर गाथा 6.0' प्रोजेक्ट का किया शुभारंभ, छात्र जानेंगे शौर्य गाथाएं; पुरस्कार जीतने का भी मौका

By Amit Tiwari Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Tue, 15 Sep 2026 04:06 PM (IST)

सीबीएसई ने रक्षा और शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से 'वीर गाथा 6.0' प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसके तहत स्कूलों में ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक फोटो

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HighLights

  1. विद्यार्थी कविता, निबंध, चित्रकला व वीडियो के जरिए दिखाएंगे प्रतिभा

  2. स्कूलों में 'वीर गाथा कार्नर' स्थापित, सुपर-100 विजेताओं को मिलेंगे 10 हजार रुपये

जागरण संवाददाता, मेरठ। देश के वीरता पुरस्कार विजेताओं और महान योद्धाओं की शौर्य गाथाओं को स्कूली विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए प्रोजेक्ट वीर गाथा 6.0 का आगाज हो गया है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने रक्षा मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से सत्र 2026-27 के लिए इस राष्ट्रव्यापी पहल की घोषणा की है।

इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में देशभक्ति, साहस, त्याग, कर्तव्यबोध और नागरिक चेतना के मूल्यों को मजबूत करना है। वर्ष 2021 में शुरू हुई इस पहल में विद्यार्थी वीरता पुरस्कार विजेताओं और देश के महान योद्धाओं के जीवन, संघर्ष और बलिदान पर रचनात्मक प्रोजेक्ट तैयार करेंगे।

तीन स्तरों पर होगी प्रतियोगिता

वीर गाथा 6.0 में कक्षा के आधार पर विद्यार्थियों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। कक्षा तीन से पांच के विद्यार्थी कविता, 150 शब्दों का पैराग्राफ, पेंटिंग या ड्राइंग के माध्यम से अपनी प्रतिभा दिखा सकेंगे। कक्षा छह से आठ के विद्यार्थियों के लिए कविता, 300 शब्दों का पैराग्राफ, पेंटिंग-ड्राइंग, मल्टीमीडिया प्रस्तुति और शार्ट वीडियो की गतिविधियां रखी गई हैं। वीडियो में एंकरिंग, स्टोरीटेलिंग अथवा युद्ध की रिपोर्टिंग जैसे प्रारूप शामिल होंगे।

इसी तरह कक्षा नौ से 12 के विद्यार्थी कविता, 750 शब्दों का निबंध, पेंटिंग-ड्राइंग, मल्टीमीडिया प्रस्तुति और शार्ट वीडियो के माध्यम से भाग ले सकेंगे। विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मकता के साथ वीरों के जीवन से जुड़े मूल्यों और उनके योगदान को प्रस्तुत करना होगा।

महान योद्धाओं की रणनीति भी जानेंगे विद्यार्थी

प्रोजेक्ट के लिए विद्यार्थियों को कई प्रेरणादायक विषय भी सुझाए गए हैं। इनमें 'मेरे आदर्श वीरता पुरस्कार विजेता __ हैं और मैंने उनके जीवन से ये मूल्य सीखे हैं...' और 'देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरता पुरस्कार विजेता की स्मृति को जीवंत रखने के लिए मैं...' जैसे विषय शामिल हैं।

इसके अलावा विद्यार्थी पृथ्वीराज चौहान, कलिंग के राजा खारवेल, छत्रपति शिवाजी सहित भारत के महान योद्धाओं की सामरिक रणनीतियों और अदम्य साहस पर प्रोजेक्ट तैयार कर सकेंगे। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम और जनजातीय विद्रोहों के योद्धाओं के संघर्ष और योगदान को भी प्रोजेक्ट में शामिल किया जा सकता है।

चार प्रविष्टियां भेजेगा हर स्कूल

सीबीएसई के कार्यक्रम के अनुसार चार अक्टूबर तक स्कूलों में वीरता पुरस्कार विजेताओं के साथ प्रत्यक्ष या वर्चुअल संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसी अवधि में स्कूल स्तर पर गतिविधियां और आंतरिक मूल्यांकन पूरा किया जाएगा।

स्कूल स्तर पर चुनी गई हर श्रेणी की सर्वश्रेष्ठ एक प्रविष्टि को पांच से 19 अक्टूबर के बीच माईगव पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इस तरह हर स्कूल से कुल चार सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टियां राष्ट्रीय स्तर की प्रक्रिया के लिए भेजी जाएंगी। सीबीएसई ने स्कूलों को अंतिम तिथि का इंतजार न करते हुए प्रविष्टियां जल्द अपलोड करने की सलाह दी है।

सुपर-100 को मिलेंगे 10 हजार रुपये

वीर गाथा 6.0 में राष्ट्रीय स्तर पर सुपर-100 विजेताओं का चयन किया जाएगा। इनमें प्रारंभिक स्तर से 25, मध्यम स्तर से 25 और माध्यमिक स्तर से 50 विद्यार्थी शामिल होंगे। हर राष्ट्रीय विजेता को रक्षा मंत्रालय की ओर से 10 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। साथ ही रक्षा मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय की ओर से संयुक्त प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से आठ विजेताओं और हर जिले से चार विजेताओं का चयन कर उन्हें सम्मानित किया जाएगा।

स्कूलों में बनेगा 'वीर गाथा कार्नर'

सीबीएसई ने संबद्ध स्कूलों को परिसर में 'वीर गाथा कार्नर' स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। इस कार्नर में सैन्य परंपराओं, युद्ध रणनीतियों और देश के वीरों के संघर्ष एवं बलिदान से संबंधित सामग्री प्रदर्शित की जाएगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को वीरता और राष्ट्रसेवा के इतिहास से लगातार जोड़ना है।
प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए विद्यार्थी गैलेंट्री अवार्ड्स की आधिकारिक वेबसाइट और एनसीईआरटी की परमवीर चक्र विजेताओं पर आधारित ई-पुस्तक सहित उपलब्ध संदर्भ सामग्री का उपयोग कर सकेंगे। इस पहल के जरिए विद्यार्थियों को केवल वीरों की गाथाएं जानने का अवसर ही नहीं मिलेगा, बल्कि उनके जीवन से साहस, अनुशासन, त्याग और राष्ट्रसेवा जैसे मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा भी मिलेगी।