मेरठ, जेएनएन। केंद्र सरकार ने कैच द रेन अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत वर्षा जल संचयन की जिम्मेदारी कई विभागों को सौंपी गई है। गत दिनों वेबिनार के जरिए जल संचयन के काम को गति देने के निर्देश भी हो चुके हैं। लेकिन यह सब सरकारी महकमे के भीतर ही चल रहा है। आम आदमी तक रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम सहित जल संचयन की अन्य योजनाओं की जानकारी कैसे पहुंचे। न तो विभागों ने तकनीकी सलाह देने का काम शुरू किया है और न ही योजनाओं का प्रचार-प्रसार। किसी भी विभाग ने जल संचयन के माध्यमों की जानकारी मुहैया कराने के लिए हेल्प लाइन नंबर भी जारी नहीं किए हैं। हैरानी की बात ये है कि जिला प्रशासन की तरफ से भी इसकी कोई पहल नहीं की जा रही है। कोई आम नागरिक अपने मकान या प्रतिष्ठान में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का इच्छुक है तो उसे भी स्वयं के खर्च पर ही लगाना होगा। कोई सरकारी आर्थिक मदद नहीं दी जाएगी। क्योंकि सरकार की तरह से ऐसा कोई प्राविधन नहीं है।

यह आ रही समस्‍या

वहीं, आम नागरिक के सामने एक और समस्या आ रही है कि उसे यह भी नहीं मालूम है कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए कौन सी डिजाइन सही है। क्योंकि कई तरह की डिजाइन चर्चा में है। ऐसे में विभागों को सही डिजाइन बताने व तकनीकी सलाह देने के लिए हेल्प लाइन नंबर जारी करने चाहिए। ताकि इच्छुक नागरिक भी वर्षा जल संचयन में अपना योगदान दे सकें।

इन विभागों को सौंपी गई जिम्मेदारी

भूगर्भ जल विभाग, नगर निगम, एमडीए, वन विभाग, उद्यान विभाग, लघु सिंचाई विभाग, कृषि विभाग, ग्राम विकास विभाग, जल निगम समेत अन्य विभागों को जल संचयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें से एमडीए और नगर निगम को शहर में सरकारी विभागों, पार्कों व बेकार हैंडपंप के पास रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करने की जिम्मेदारी दी गई है। विभाग अपने खर्च पर ये काम करेंगे।

 

Edited By: Taruna Tayal