मेरठ, जेएनएन। जिले के बिल्डर सरकार किसी भी अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के तहत मकान बनाने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। हाल ही में अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग काम्प्लेक्सस्कीम शुरू की गई है। जिसमें कांप्लेक्स बनाकर प्रवासी श्रमिकों को किराये पर मकान देना है। इसमें बिल्डरों को तमाम छूट दी जाएगी फिर भी कोई बिल्डर इसके लिए तैयार नहीं है। इससे पहले भी यहां के बिल्डर गरीबों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भी फ्लैट बनाने से इन्कार कर चुके हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभार्थियों से दो लाख रुपये में फ्लैट बेचने का नियम था लेकिन बिल्डरों ने इसमें परेशानी बताई तो इस साल मार्च में शासनादेश जारी हुआ कि बिल्डर जो फ्लैट बनाएंगे उसे लाभार्थी को 3.50 लाख तक बेच सकते हैं। छह लाख की कीमत में एक फ्लैट तैयार करना है। सरकार प्रति फ्लैट बिल्डर को 2.50 लाख रुपये सब्सिडी देगी।इस छूट के बाद भी कोई तैयार नहीं हुआ। जबकि बिल्डरों को दो हजार फ्लैट बनाने का लक्ष्य दिया गया था।

प्रधानमंत्री आवास योजना में बिल्डरों की यह है खास परेशानी

-प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान 4.50 लाख रुपये में बनाना था जिसे बिल्डरों की मांग पर। छह लाख किया गया।

-बिल्डरों की यह भी मांग थी कि बिल्डिंग बनाकर वे प्राधिकरण को सौंप दें। वे खुद फ्लैट बेचने की प्रक्रिया से हटना चाहते हैं।

-बिल्डर बिल्डिंग बनाकर सौंपना चाहते हैं। वे उसके बाद मेंटीनेंस नहीं करना चाहते। चाहते हैं कि मेंटीनेंस सरकार अपनी तरफ से कराए।

-सड़क की चौड़ाई 12 मीटर न होने पर छूट चाहते हैं जबकि इतनी चौड़ाई अनिवार्य है।

अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग स्कीम में बिल्डरों को यह है परेशानी

-बिल्डर चाहते हैं कि बिल्डिंग बनाकर प्राधिकरण को सौंप दें। उन्हें किराया वसूलने की प्रक्रिया से दूर रखा जाए।

-बिल्डर नहीं चाहते कि उन्हें मेंटीनेंस के लिए मजबूर किया जाए।

-इस काम्प्लेक्स योजना में भी बिल्डर 12 मीटर चौड़ी सड़क की अनिवार्यता नहीं चाहते।

इन्होंने कहा...

बिल्डरों से बैठक की गई थी। उनकी परेशानी को शासन को अवगत कराया जाएगा। हाल ही में बिल्डरों के दिए सुझाव को शासन को भेजा गया है।

-राजेश पांडेय, उपाध्यक्ष, एमडीए 

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