विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

हर्षवर्धन काल का 1326 साल पुराना नक्शा बताएगा, कहां से बहती थी बूढ़ी गंगा? NGT में पेश होगी इसकी 'जन्मपत्री'

By Rajendra Sharma Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Wed, 12 Aug 2026 04:13 PM (IST)

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश पर बूढ़ी गंगा के 1326 साल पुराने ऐतिहासिक मानचित्र और दस्तावेज राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ...और पढ़ें

नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा के कार्यकारी निदेशक तकनीकी अनूप श्रीवास्तव को बूढ़ी गंगा से संबंधित नक्शे एवं पत्र सौंपते असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियंक भारती चिकारा (बाएं) और हस्तिनापुर के पांडवान में बूढ़ी गंगा की धारा।

नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा के कार्यकारी निदेशक तकनीकी अनूप श्रीवास्तव को बूढ़ी गंगा से संबंधित नक्शे एवं पत्र सौंपते असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियंक भारती चिकारा (बाएं) और हस्तिनापुर के पांडवान में बूढ़ी गंगा की धारा।

HighLights

  1. राजा हर्षवर्धन से लेकर अंग्रेजी शासन तक के ऐतिहासिक मानचित्र शामिल

  2. एनजीटी के आदेश के बाद एनएमएसजी को सौंपे गए ऐतिहासिक दस्तावेज।

राजेंद्र शर्मा, मेरठ। बूढ़ी गंगा का सदियों पुराना इतिहास अब मानचित्र से सामने आएगा। इस दिशा में अब महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेश के बाद बूढ़ी गंगा से जुड़े 1326 वर्ष पुराने ऐतिहासिक मानचित्र और दस्तावेज राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) को सौंपे हैं।

इन नक्शों में राजा हर्षवर्धन के काल से लेकर अंग्रेजी शासन तक के विभिन्न ऐतिहासिक मानचित्र शामिल बताए गए हैं। इन दस्तावेजों में बूढ़ी गंगा के उद्गम, पुराने नदी मार्ग, हस्तिनापुर में विस्तृत प्रवाह और गंगा में मिलन तक के महत्वपूर्ण संकेत मौजूद हैं। यही कारण है कि इन मानचित्र को बूढ़ी गंगा के इतिहास को समझने वाली महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

महानिदेशक के निर्देश पर तकनीकी अधिकारी ने संभाले नक्शे

एनएमसीजी के महानिदेशक के निर्देश पर कार्यकारी निदेशक (तकनीकी) अनूप श्रीवास्तव ने शोभित यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियंक भारती चिकारा से ये ऐतिहासिक नक्शे और दस्तावेज प्राप्त किए। इसके बाद नक्शों को लेकर काफी देर तक चली बैठक में प्रत्येक महत्वपूर्ण बिंदु को समझा गया। नक्शों में दर्ज उद्गम स्थल, प्राचीन नदी-पथ, हस्तिनापुर क्षेत्र में बूढ़ी गंगा के विस्तृत प्रवाह तथा गंगा में मिलन स्थल से जुड़े तथ्यों को विस्तार से समझाया।

एनएमसीजी का रुख सकारात्मक

बूढ़ी गंगा के ऐतिहासिक स्वरूप को लेकर हुई यह बैठक काफी महत्वपूर्ण रही। नक्शों और दस्तावेजों को समझने के लिए लंबी और विस्तृत मंथन हुआ। एनएमसीजी की ओर से इस पूरे विषय को लेकर सकारात्मक रुख दिखाई दिया। बैठक में उपलब्ध ऐतिहासिक प्रमाणों के अध्ययन और आगे की कार्रवाई को लेकर सकारात्मक संकेत मिले। एनएमसीजी की ओर से यह भरोसा भी दिया गया कि इस दिशा में कार्य आगे बढ़ाया जाएगा और जल्द ही सही और सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।

यह भी पढ़ें- VIDEO: आस्था और इंसानियत का महासंगम: जनाजे के सम्मान में मेरठ की तरह बिजनौर में भी थमे कांवड़ियों के कदम; बंद किया DJ

इन नक्शों में बूढ़ी गंगा की पूरी कहानी

प्रियंक भारती का कहना है कि इन ऐतिहासिक नक्शों में बूढ़ी गंगा के उद्गम से लेकर गंगा में मिलन तक की कहानी के महत्वपूर्ण प्रमाण मौजूद हैं। हस्तिनापुर में नदी का पुराना विस्तृत प्रवाह भी इन नक्शों से समझा जा सकता है। अब इन ऐतिहासिक प्रमाणों को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक से जोड़कर बूढ़ी गंगा के वास्तविक स्वरूप को सामने लाने का प्रयास होगा।

बूढ़ी गंगा के उद्गम से लेकर गंगा में मिलन तक के ऐतिहासिक एवं वैज्ञानिक तथ्यों को एक साथ रखकर रिपोर्ट तैयार की जानी है। 16 अक्टूबर को इस रिपोर्ट को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के समक्ष महानिदेशक को प्रस्तुत करना है।