मेरठ, जेएनएन। कोरोना के साथ ही ब्लैक फंगस ने भी प्रशासन के सामने चुनौती ख़ड़ी कर दी है। जिला स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश सरकार को 27 मरीजों की सूची भेज दी है। मेडिकल कालेज में सर्वाधिक आठ मरीजों में ब्लैक फंगस मिल चुका है। आधा दर्जन मरीजों को नई दिल्ली एवं एम्स ऋषिकेश के लिए रेफर किया जा चुका है।

उधर, सोमवार को आनंद अस्पताल में दो मरीजों का आपरेशन किया गया। इस बीच सोमवार को मेरठ मेडिकल कालेज के 1989 बैच के डा. राजीव शर्मा भी ब्लैक फंगस के शिकार हो गए। फिलहाल मुजफ्फरनगर मेडिकल कालेज में फार्माकोलाजी के प्रोफेसर डा. राजीव पिछले 20 दिनों से ब्लैक फंगस से लड़ रहे थे। उनका उपचार न्यूटिमा में चल रहा था। अब तक तीन मरीजों की ब्लैक फंगस से मौत हो चुकी है।

मंडलीय सíवलास अधिकारी डा. अशोक तालियान ने बताया कि सोमवार को ब्लैक फंगस के छह नए केस मिले हैं। कई डाक्टरों ने ओपीडी में नए मरीज मिलने की सूचना दी है। मेडिकल कालेज के नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. लोकेश ने बताया कि अब तक आठ मरीज मिले हैं, जिसमें से तीन को रेफर किया गया। अन्य मरीजों को एम्फोटेरिसिन बी दवा दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक न्यूटिमा अस्पताल में पाच, आनंद अस्पताल में पाच, सुभारती, सिरोही, साईं, कैलाश व मेरठ किडनी अस्पताल में एक मरीज मिल चुका है, जबकि लोकप्रिय में तीन व केएमसी में दो मरीज मिले हैं।

इनका कहना-

ब्लैक फंगस से बचने के लिए पोस्ट कोविड मरीजों को प्रदूषण से दूर और मास्क में रहने के लिए कहें। नाक में पपड़ी, भूरा या हरा डिस्चार्ज, चेहरे व आख में दर्द होते ही डाक्टर से संपर्क करें। इस फफूंद को हटाने के लिए आपरेशन सबसे कारगर इलाज है। आइसीयू से निकलने वाले मरीजों में फंगस मिलता रहेगा।

डा. जेवी चिकारा, क्रिटकल केयर विशेषज्ञ