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सुख का अनुभव करना है! दीपावली तक क्रोध न करें; सुबह उठते ही मोबाइल न देखें... ध्यान के लिए समय निकालें

By Amit Tiwari Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Tue, 27 Oct 2026 06:10 AM (IST)

बीके शिवानी ने दीपावली तक क्रोध न करने, सुबह मोबाइल से दूर रहने और ध्यान करने का संदेश दिया। उन्होंने ...और पढ़ें

अंतरराष्ट्रीय मार्गदर्शिका बीके शिवानी बहन। जागरण

अंतरराष्ट्रीय मार्गदर्शिका बीके शिवानी बहन। जागरण

HighLights

  1. दीपावली तक 10 दिन क्रोध बिल्कुल भी न करने का संकल्प लें।

  2. सुबह उठते ही मोबाइल न देखें, ध्यान के लिए समय निकालें।

  3. मन की स्वच्छता और सकारात्मक विचार ही वास्तविक सुख है।

जागरण संवाददाता, मेरठ। दीपावली पर घर की सफाई के साथ मन के कोने-कोने को भी स्वच्छ बनाएं। पुरानी कड़वाहट, शिकायतों और क्रोध को छोड़कर शांति, प्रेम और सकारात्मकता को जीवन का हिस्सा बनाएं। जब मन शांत होगा, तभी घर का वातावरण सुखद बनेगा।

यह संदेश अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक वक्ता राजयोगिनी बीके शिवानी बहन ने सोमवार को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) के नेताजी सुभाष चंद्र बोस सभागार में आयोजित कार्यक्रम में दिया। उन्होंने लोगों को दीपावली तक 10 दिन क्रोध न करने, सुबह उठते ही मोबाइल देखने से बचने और प्रतिदिन ध्यान के लिए समय निकालने का संकल्प दिलाया।

बीके शिवानी ने कहा कि लक्ष्मी को केवल धन का प्रतीक नहीं, बल्कि दिव्यता और दैवी गुणों के रूप में समझना चाहिए। मन की स्वच्छता से ही जीवन में वास्तविक शांति और सुख का अनुभव हो सकता है। विचारों की शक्ति समझाते हुए कहा कि संकल्प से भावनाएं बनती हैं और भावनाओं का प्रभाव हमारे व्यवहार और संबंधों पर पड़ता है।

परिस्थितियां हमेशा हमारे नियंत्रण में नहीं होतीं, लेकिन उन पर प्रतिक्रिया कैसे देनी है, यह हमारे हाथ में है। क्रोध करने से पहले व्यक्ति स्वयं नकारात्मक भावनाओं का अनुभव करता है। इसलिए दूसरों की गलती के कारण अपना मानसिक संतुलन और स्वास्थ्य खराब नहीं करना चाहिए।

उन्होंने अभिभावकों से कहा कि बच्चों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ उन्हें मानसिक शांति और भावनात्मक संबल देना भी जरूरी है। असफलता, निराशा या किसी परेशानी के समय बच्चे को डांटने के बजाय उसकी बात सुनें और उसे भरोसा दें। उनके अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) जानकारी उपलब्ध करा सकती है, लेकिन मानवीय स्नेह, संवेदना और भावनात्मक सहारा नहीं दे सकती। परिवार में कम से कम एक व्यक्ति ऐसा होना चाहिए, जो शांत रहकर दूसरों को शक्ति दे सके।

उन्होंने दिनचर्या में बदलाव के लिए सुबह उठने के बाद सबसे पहले मोबाइल न देखने, पांच से दस मिनट ध्यान करने और रात को सोने से एक घंटा पहले मोबाइल और नकारात्मक सामग्री से दूरी बनाने की सलाह दी। उन्होंने भोजन बनाते और खाते समय शांत मन रखने, परिवार के साथ सकारात्मक संवाद करने और नियमित राजयोग ध्यान का अभ्यास करने पर भी जोर दिया।

उन्होंने सकारात्मक संकल्पों को दोहराने की प्रेरणा देते हुए कहा कि व्यक्ति स्वयं को शक्तिशाली, शांत और प्रसन्न आत्मा मानकर अपने व्यवहार में बदलाव ला सकता है। बहन सारिका ने आभार व्यक्त किया। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला, राज्यसभा सदस्य डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, पूर्व सांसद राजेंद्र अग्रवाल, नगर आयुक्त सौरभ गंगवार, जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा, मुख्य विकास अधिकारी नूपुर गोयल, सीओ सौम्या अस्थाना, अपर पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह और एसपी ट्रैफिक राजेश श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।