मेरठ, जेएनएन। गांवड़ी में कूड़ा निस्तारण प्लांट के भूमि पूजन पर न बुलाए जाने से भाजपा पार्षदों में नाराजगी है। मंगलवार को पार्षद कैंप कार्यालय पहुंचे और नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने सवाल किया कि कूड़ा निस्तारण का यह फार्मूला कहां से आया, मेरठ महानगर में इसकी उपयोगिता क्या है? इसके अलावा कई अन्य मुद्दे भी उठाए।

कैंप कार्यालय पहुंचकर सौंपा ज्ञापन

भाजपा पार्षद दल के नेता विपिन जिंदल, ललित नागदेव, राजीव गुप्ता काले, संदीप रेवड़ी, अंशुल गुप्ता, डिंपल चौधरी समेत अन्य पार्षद मंगलवार को नगर आयुक्त के कैंप कार्यालय पहुंचे तथा उन्हें ज्ञापन सौंपा। पार्षदों ने गांवड़ी और लोहिया नगर में लगने जा रहे कूड़ा निस्तारण प्लांट को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह कूड़ा निस्तारण का फार्मूला कहां से आया। क्या किसी तकनीकी टीम से इसका परीक्षण कराया गया है। अगर परीक्षण हुआ है तो उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। पार्षदों ने कहा कि क्या 16 करोड़ के बजट में शहर के कूड़े का निस्तारण हो जाएगा? कहा कि यदि पैसे का सदुपयोग न हुआ तो इसकी जिम्मेदारी नगर आयुक्त समेत सभी अधिकारियों की होगी।

ये सवाल उठाए

उन्होंने बिना कार्यकारिणी, बोर्ड बैठक में प्रस्ताव स्वीकृति के जलापूर्ति के लिए 10 करोड़ का बजट रखने का कारण भी पूछा। आरोप लगाया कि नगर निगम की करीब 900 दुकानें है। बड़ी संख्या में शिकमी किराएदार के नाम पर किरायेदारी ट्रांसफर कर दी गई है। पार्षदों ने आउट सोर्सिग कंपनियों का अनुबंध, 50 नई कूड़ा गाड़ियों की खरीद, मानसरोवर में गेल गैस कंपनी द्वारा खोदी गई सड़क का निर्माण न कराने को लेकर सवाल उठाए। नगर आयुक्त ने पार्षदों की बात सुनी। कहा कि शहर में कूड़ा निस्तारण बड़ी चुनौती है। इसका निस्तारण करना है। इस दिशा में कार्य शुरू किया है। दो चरणों में चार प्लांट लगाकर कूड़ा निस्तारण की योजना है। इसकी शुरुआत गांवड़ी से की है।

आठ साल से नाले ढकने का सपना अधूरा

शहर के खुले नालों को ढकने के लिए वर्ष 2012 से अभी तक कई प्रस्ताव बन चुके हैं। लेकिन इनमें से एक पर भी नगर निगम प्रशासन ने अमल नहीं किया। हर साल नालों में गिरकर जनहानि हो रही है। इसे रोकने के लिए बने प्रस्ताव धूल फांक रहे हैं। लापरवाही की बानगी तो देखिए..इसके प्रति न जनप्रतिनिधि गंभीर हैं और न ही अफसर। नतीजा इस बार नगर निगम के आउटसोर्स सफाई कर्मी की जान चली गई।

नहीं आया कोई प्रस्‍ताव

चार जून 2012 को तत्कालीन नगर विकास मंत्री आजम खां मेरठ दौरे पर आए थे। उस वक्त 407 करोड़ से 30 पुराने खुले नालों को ढकने, उनके ऊपर मल्टी लेवल पार्किंग, घूमने के लिए बगीचा और चारों ओर पेड़ लगाने की घोषणा की थी। उस वक्त प्रयोग के तौर पर आबू नाला एक के 200 मीटर हिस्से को ढका गया था। जो एमएलसी सरोजनी अग्रवाल के आवास के सामने है। यह प्रयोग सफल माना गया था, लेकिन इसके बाद प्रस्ताव पर कोई काम नहीं हुआ। वहीं वर्ष 2014 में नेहरू नगर के नाले में गिरकर 12 वर्षीय मंदबुद्धि किशोर गौरव की मौत हो गई थी। यह मामला हाई कोर्ट पहुंचा था।

बजट का अभाव आड़े आया

फटकार के बाद नगर निगम अधिकारियों ने नालों की दीवारें ऊंची करने, नालों को ढकने के लिए उनके ऊपर लोहे का जाल लगाने का प्रस्ताव बना डाला था। तत्कालीन अधिकारियों ने करीब 431 करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया था, जो शासन के पास स्वीकृति और धनराशि आवंटन के लिए भेजा गया था। लेकिन यह प्रस्ताव भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। वर्ष 2018 में एक बार फिर लोहे का जाल नालों में लगाने की कवायद में नगर निगम के अधिकारी जुटे थे। प्लान भी बना लिया था। पर बजट के अभाव में बात आगे नहीं बढ़ी। मालूम हो कि शहर में 315 छोटे-बड़े नाले हैं। जिनमें ओडियन, आबू नाला एक व दो समेत कुल 39 बड़े नाले हैं।

भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रभारी मंत्री से करेंगे बात

भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी की ओर से नगर विकास विभाग को एक प्रस्ताव दिया था। जिसमें छतरी वाले पीर से घंटाघर तक और घंटाघर से किशनपुरी तक नाले का ढकने की मांग की थी। दो चरणों में कार्य के लिए नौ-नौ करोड़ रुपये की स्वीकृति हो चुकी है। नगर निगम को नालों को ढकने का काम करना है। नाला ढकने के बाद पीडब्ल्यूडी सड़क बनाएगी। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि शासन से बजट नहीं मिलने से कोई काम नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि 24 अक्टूबर को प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा आ रहे हैं। इस संबंध में उनसे बात करेंगे। 

Posted By: Prem Bhatt

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