मेरठ, जेएनएन : छावनी परिषद के सात सदस्यों ने एकजुट होकर उपाध्यक्ष के पद से बीना वाधवा को हटा दिया। सात सदस्यों के अविश्वास प्रस्ताव को बोर्ड ने स्वीकार लिया, लेकिन नए उपाध्यक्ष के चुनाव को 31 जुलाई तक के लिए टाल दिया गया है। बीना वाधवा के तर्क के आगे सभी सदस्य निरुत्तर हुए। कैंट की राजनीति में कर्नाटक की राजनीति की झलक देखने को मिली।

बुधवार को छावनी के सात सदस्य उपाध्यक्ष बीना वाधवा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर बोर्ड अध्यक्ष डिप्टी जीओसी के पास पहुंचे थे। 48 घंटे के बाद गुरुवार को शाम चार बजे विशेष बोर्ड बैठक में बीना वाधवा सहित सभी सदस्य पहुंचे। बीना ने चार साल तक के कार्यो के लिए सभी के सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। इसके बाद सीईओ प्रसाद चव्हाण ने एजेंडा रखा। पहले एजेंडे में सभी सदस्यों ने एक स्वर में बीना वाधवा को उपाध्यक्ष के पद से हटाने पर अपनी सहमति दी। दूसरे एजेंडे पर जैसे ही उपाध्यक्ष के पद पर सदस्यों ने वार्ड आठ के सदस्य विपिन सोढ़ी के नाम पर अपनी सहमति दी। बीना वाधवा ने कैंट की 1937 की धारा चार के तहत कहा कि विशेष बैठक के बाद चार दिन के नोटिस के बाद ही उपाध्यक्ष का चुनाव हो सकता है। जिस पर सभी सदस्यों ने विरोध दर्ज किया। उपाध्यक्ष पद की दावेदारी पेश करने वाले विपिन सोढ़ी ने भी कई तर्क रखे। सदस्यों के बीच भी काफी बहस हुई। बीच में बोर्ड अध्यक्ष डिप्टी जीओसी को पांच मिनट के लिए बैठक स्थगित करनी पड़ी, लेकिन बाद में कैंट एक्ट को मानते हुए 31 जुलाई को उपाध्यक्ष के पद पर चुनाव का निर्णय लिया गया। बैठक में डिप्टी जीओसी अनमोल सूद के अलावा सीईओ प्रसाद चव्हाण, कर्नल आलोक डी सेन, कर्नल रोहित पंत, मेजर एनए मैथई के अलावा निर्वाचित सदस्यों में रिनी जैन, बुशरा कमाल, नीरज राठौर, अनिल जैन, मंजू गोयल, धमेंद्र सोनकर, विपिन सोढ़ी रहे। बोर्ड का गठन 15 जुलाई 2015 को हुआ था। जिसमें 20 जुलाई को बीना वाधवा उपाध्यक्ष चुनी गई थीं। बीना चार साल उपाध्यक्ष रहीं। बोर्ड का कार्यकाल एक साल बचा है। जिसके लिए अब नए उपाध्यक्ष का चुनाव होगा।

Posted By: Jagran

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