मेरठ,जेएनएन। डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन उत्तर प्रदेश की मेरठ शाखा के कार्यकारिणी चुनाव को लेकर फार्मासिस्टों में जबरदस्त उत्साह रहा। शनिवार को सीएमओ कार्यालय पर हुए मतदान में दौराला सीएचसी से संबद्ध फार्मासिस्ट बिजेंद्र सिंह को निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया, जबकि महिला अस्पताल में कार्यरत फार्मासिस्ट अमित बरनवाल को वरिष्ठ उपाध्यक्ष व मनीष गुप्ता उपाध्यक्ष चुने गए।

कार्यकारिणी का द्विवार्षिक चुनाव एसोसिएशन के मुरादाबाद मंडल के मंडलीय सचिव हेमंत चौधरी की निगरानी में संपन्न हुआ। जिला अस्पताल के चीफ फार्मासिस्ट वीके मलिक व सीएमएसडी स्टोर के फार्मासिस्ट युद्धवीर सिंह चुनाव अधिकारी रहे। कार्यकारिणी के मंत्री व कोषाध्यक्ष पद के लिए 108 फार्मासिस्टों ने वोट डाले। मंत्री पद के लिए तीन दावेदारों में शकील अहमद ने 62 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। उनके प्रतिद्वंदी राकेश कुमार को 11 और एके रस्तोगी को 35 वोट ही मिले। वहीं, कोषाध्यक्ष पद पर गौरव वशिष्ठ ने 82 वोट पाकर जीत दर्ज की। उनके प्रतिद्वंदी प्रवीन गर्ग को 25 वोट मिले, जबकि एक वोट अमान्य कर दिया गया। कार्यकारिणी के अन्य पदों पर गिरीश रावत संगठन मंत्री, नवीन कुमार संयुक्त मंत्री व महेश चंद संप्रेक्षक चुने गए। इस दौरान सीएमओ डा. अखिलेश मोहन व प्रांतीय कार्यकारिणी के अध्यक्ष संदीप बडोला, महामंत्री उमेश मिश्रा ने नवीन कार्यकारिणी को पद की शपथ दिलाई।

संतों और विद्वानों का निरादर करने वाला पाप का भागी होता है : सम्राट पैलेस स्थित राजराजेश्वरी मंदिर परिसर में शनिवार को भागवत कथा के सातवें दिन कथा प्रवक्ता और कथा व्यास ने संतों और विद्वानों का आदर करने का उपदेश दिया। कथा प्रवक्ता अभिषेक कृष्ण आनंद ने कहा कि संतों और विद्वानों का अपमान नहीं करना चाहिए। उनके श्राप का बुरा परिणाम भुगतान पड़ता है। कथा व्यास राधिकानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि भागवत कथा का श्रवण ही एकमात्र उपाय है जिससे हम अपने पापों से निवृत्ति कर सकते हैं। 16 को हवन और भंडारे के बाद भागवत कथा का समापन होगा। पोंगल का पर्व मनाया : दक्षिण भारत का प्रमुख पोंगल पर्व शनिवार को मेरठ में रह रहे परिवारों ने आस्था और उत्साह से मनाया। मोदीपुरम एटूजेड कालोनी, ब्रह्मपुरी और शारदा रोड पर दक्षिण भारत विशेष रूप से केरल के रहने वाले लोगों ने पर्व मनाया। यह पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है। 17 जनवरी तक इस पर्व के तहत अलग-अलग पूजन होगा। 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाने वालों ने मंदिरों में खिचड़ी और रेवड़ी का दान किया।

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