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बाॅक्सिंग फेडरेशन में गहराया विवाद, मेरठ पहुंचे महासचिव ने अध्यक्ष पर साधा निशाना, बोले- खेलों के मंच पर न हो राजनीति

By Amit Tiwari Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Thu, 15 Oct 2026 04:32 PM (IST)

भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआइ) में अध्यक्ष अजय सिंह और महासचिव प्रमोद कुमार के बीच विवाद गहरा गया है। महासचिव ने ...और पढ़ें

कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित प्रदेश स्तरीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता के दौरान पहुंचे बीएफआइ महासचिव प्रमोद कुमार युगल (मध्य में)।

कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित प्रदेश स्तरीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता के दौरान पहुंचे बीएफआइ महासचिव प्रमोद कुमार युगल (मध्य में)।

HighLights

  1. बीएफआइ में सत्ता संघर्ष तेज, अध्यक्ष और महासचिव आमने-सामने।

  2. दोनों ने एक-दूसरे को किया है निलंबित, संविधान उल्लंघन के आरोप।

जागरण संवाददाता, मेरठ। भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआइ) में अध्यक्ष अजय सिंह और महासचिव प्रमोद कुमार युगल के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। महासंघ की कार्यप्रणाली, वित्तीय प्रबंधन और खिलाड़ियों के हितों को लेकर दोनों पदाधिकारी आमने-सामने हैं।

महासचिव प्रमोद कुमार ने विवाद पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनका उद्देश्य खिलाड़ियों को बेहतर अवसर देना और भारतीय मुक्केबाजी को आगे बढ़ाना है। उन्होंने अध्यक्ष की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि खेल के मंच पर खिलाड़ियों के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, न कि आपसी टकराव को।

कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम में चल रही प्रदेश स्तरीय मुक्केबाजी प्रतियोगिता में गुरुवार को खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने पहुंचे प्रमोद प्रमोद कुमार ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से उन्हें चाय पर आमंत्रित किया गया था। उनके अनुसार भारतीय मुक्केबाजों के बेहतर प्रदर्शन से प्रभावित होकर यह निमंत्रण दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अध्यक्ष अजय सिंह ने उन्हें अस्थायी रूप से निलंबित करने की घोषणा की, जबकि महासंघ के संविधान के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

‘अध्यक्ष की सोच खेलों के अनुरूप नहीं’

प्रमोद कुमार ने कहा कि उनकी पृष्ठभूमि खेलों से जुड़ी रही है। वह स्कूल और विश्वविद्यालय स्तर पर चैंपियन रहे हैं और एशियाई खेलों में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि महासंघ में अध्यक्ष और महासचिव की जिम्मेदारियां अलग-अलग होती हैं। महासचिव का काम जमीनी स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित करना और खेल गतिविधियों को आगे बढ़ाना है, जबकि अध्यक्ष की भूमिका संसाधन जुटाने और संबंधित संस्थाओं से समन्वय करने की होती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि महासंघ को अध्यक्ष की ओर से अपेक्षित आर्थिक सहयोग और प्रायोजन नहीं मिल पाया। उनके अनुसार उन्होंने संसाधनों की कमी के बावजूद राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं आयोजित कराने का प्रयास किया। सब-जूनियर और जूनियर स्तर की प्रतियोगिताएं करीब सात साल से नहीं हुई थीं। इन्हें दोबारा शुरू करना युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी था।

‘उधार लेकर कराईं प्रतियोगिताएं’

प्रमोद कुमार ने कहा कि प्रतियोगिताओं के आयोजन के दौरान कई बार उन्हें उधार लेकर व्यवस्थाएं करनी पड़ीं। उनका लक्ष्य राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और विश्व मुक्केबाजी कप का सफल आयोजन सुनिश्चित करना था। उन्होंने अपने ऊपर लगाए जा रहे वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को गलत बताया और कहा कि महासंघ के कोष और वित्तीय प्रबंधन से संबंधित जिम्मेदारियां अन्य पदाधिकारियों के पास भी हैं।

40 करोड़ रुपये के दावे पर उठाए सवाल

महासचिव ने अध्यक्ष अजय सिंह के 40 करोड़ रुपये जुटाने के दावे पर भी सवाल उठाए। प्रमोद कुमार के अनुसार इस राशि से संबंधित समझौता भारत सरकार, इंडियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड (आइओसीएल) और भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के बीच हुआ था। उन्होंने कहा कि इस समझौते में बीएफआइ की ओर से हस्ताक्षर नहीं किए गए थे। उन्होंने अध्यक्ष की ओर से इस राशि का श्रेय लेने पर आपत्ति जताई।

‘निलंबन के लिए संवैधानिक प्रक्रिया जरूरी’

प्रमोद कुमार ने कहा कि किसी पदाधिकारी को निलंबित करने के लिए महासंघ के संविधान के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया अपनानी चाहिए। उनके अनुसार कार्यकारी समिति की बैठक में विषय पर विचार और आवश्यक साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके मामले में ऐसा नहीं किया गया। कहा कि यदि उनके खिलाफ बिना प्रमाण के सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए गए हैं तो वह मानहानि का कानूनी विकल्प भी अपना सकते हैं।

अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी

बीएफआइ में जारी विवाद के बीच प्रमोद कुमार ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी की बात स्वीकार की। उन्होंने कहा कि महासंघ में ऐसे पदाधिकारियों की जरूरत है जो खिलाड़ियों के लिए काम करें। उनके अनुसार खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, चिकित्सा सुविधाओं, फिजियोथेरेपी, पोषण, प्रशिक्षण शिविर और अंतरराष्ट्रीय दौरों पर होने वाला खर्च मुख्य रूप से सरकारी सहायता से पूरा होता है। ऐसे में महासंघ को खिलाड़ियों के लिए बेहतर अवसर और प्रतियोगिताओं का माहौल तैयार करने पर ध्यान देना चाहिए।