मेरठ,जेएनएन। मेरठ और आस-पास के क्षेत्र से एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों की संख्या सर्वाधिक है। इनमें भी विभिन्न दौड़ के साथ ही नौकरियों के लिए दौड़ का अभ्यास करने वाले युवाओं की संख्या अच्छी खासी है। एथलीट्स के लिए सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक आज तक मेरठ को नहीं मिल सका है जबकि मिट्टी पर दौड़ कर उन्हें सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक पर अभ्यास करने वाले धावकों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है। खिलाड़ी पदक जीतने के बाद नहीं पदक जीतने की तैयारी के लिए संसाधन और सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। -मतदान को लेकर उत्साहित हूं लेकिन चिंता इस बात की भी है कि राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद भी नौकरी को लेकर आश्वस्त नहीं हूं। हमारे जिले में खेल विवि तो बनने जा रहा है लेकिन वहां तक पहुंचने की बुनियादी सीढ़ी स्पो‌र्ट्स स्कूल, स्पो‌र्ट्स कालेज तो संसाधन भी पर्याप्त नहीं हैं। मैं प्रदेश की नई सरकार से अपेक्षा करूंगा कि जमीन स्तर पर खेल का संसाधन बढ़ाएं और देश के लिए पदक जीतने वालों को रोजगार देकर उनका करियर सुनिश्चित करें।

-अर्णव त्यागी, राष्ट्रीय खिलाड़ी, ऊंची कूद -मेरठ के खिलाड़ियों को सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक की सबसे ज्यादा जरूरत है। तभी तैयारी ठीक से हो सकती है। खेल संसाधन बढ़ रहे हैं पर जमीनी स्तर पर बहुत कुछ करना बाकी है। पदक जीतने के बाद खिलाड़ियों को पैसे भी समय से नहीं मिलते जिससे खिलाड़ी निराश होते हैं।

-सचिन कुमार, राष्ट्रीय धावक, 400 मीटर -मेरठ में सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक बहुत जरूरी है। छोटी उम्र में खिलाड़ियों की मदद के लिए सरकारी योजनाएं होनी चाहिए। खेल कोटे में नियुक्तियां होनी चाहिए। पदक विजेता खिलाड़ियों को मिलने वाली पुरस्कार राशि बकाया है जो मिलना चाहिए। पदक जीतने के कई साल तक भी नहीं मिलता है।

-नितिन कुमार, नेशनल एथलीट, 400 मीटर धावक -खेल में खिलाड़ियों को इंजरी बहुत होती है। उसका सही इलाज नहीं मिलने से बहुत से अच्छे खिलाड़ी मजबूरी में खेल छोड़ देते हैं। सभी पंजीकृत खिलाड़ियों के लिए निश्शुल्क स्वास्थ्य बीमा होना चाहिए।

-रजत कुमार, राष्ट्रीय खिलाड़ी, लंबी कूद -टोक्यो पैरालिंपिक गेम्स में पैरा खिलाड़ियों ने सर्वाधिक पदक जीता है। यह तब है जब प्रदेश या जिला स्तर पर सुविधाएं नहीं हैं। पैरा खिलाड़ियों की जरूरतों के अनुरूप खेल का मैदान मुहैया कराया जाए तो पदक आने का सिलसिला कभी नहीं थमेगा।

-रवि यादव, राष्ट्रीय पैरा एथलीट, ऊंची कूद -खिलाड़ी जरूरतमंद परिवारों से निकलते हैं और अपना सर्वस्व लगाकर खेल में आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं। इसलिए खिलाड़ियों के लिए रोजगार की व्यवस्था होनी चाहिए जिससे वह अपने भविष्य को लेकर चिंतित न रहें और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फलक पर पदक जीत कर देश का नाम रोशन करें।

-रविंद्र तालियान, राष्ट्रीय एथलीट, 400 मीटर धावक

Edited By: Jagran