Asian Games 2026: रेड कार्ड्स ने तोड़ा प्रियंका गोस्वामी का मेडल का सपना, 42 KM वाॅक में 9 किमी पर ही सफर हुआ खत्म
Asian Games 2026: मेरठ निवासी ओलंपियन प्रियंका गोस्वामी एशियाई खेलों की 42 किमी मैराथन रेस वाॅक में चार रेड कार्ड ...और पढ़ें

प्रियंका गोस्वामी। फाइल फोटो
HighLights
चार रेड कार्ड के बाद टीआर54.7.5 के तहत हुईं अयोग्य।
तकनीकी नियमों के उल्लंघन के कारण पदक की उम्मीद टूटी।
जागरण संवाददाता, मेरठ। एशियाई खेलों में पदक की उम्मीद लेकर 20 किमी से 42 किमी की मैराथन रेस वाक में उतरी मेरठ की ओलंपियन प्रियंका गोस्वामी का सफर रविवार को महज नौ किलोमीटर में समाप्त हो गया।
लंबे अंतरराष्ट्रीय अनुभव और दो ओलिम्पिक में हिस्सा ले चुकी प्रियंका से इस नए इवेंट में पदक की उम्मीद थी, लेकिन तकनीकी नियमों के उल्लंघन के कारण उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। प्रियंका को कुल चार रेड कार्ड मिले। दो ग्राउंड से संपर्क टूटने (लास आफ कान्टैक्ट) और दो घुटने के मुड़ने (नी फ्लेक्शन) के कारण।
चार रेड कार्ड ने रोकी राह
रेस वाक में खिलाड़ी के एक पैर का जमीन से संपर्क बना रहना जरूरी है। साथ ही आगे बढ़ते समय आगे वाले पैर का घुटना सीधा रहना चाहिए। इन दोनों तकनीकी मानकों की निगरानी जज लगातार करते हैं। नियम टीआर54.7.5 के तहत चौथा रेड कार्ड मिलते ही खिलाड़ी को प्रतियोगिता से अयोग्य घोषित कर दिया जाता है।
प्रियंका को पहला रेड कार्ड संपर्क टूटने पर मिला। इसके बाद घुटने के मुड़ने पर दूसरा कार्ड मिला। तीसरा कार्ड फिर संपर्क टूटने और चौथा घुटने के मुड़ने पर मिला। चौथा कार्ड मिलते ही नौ किलोमीटर के आसपास उनका मुकाबला समाप्त हो गया।
20 किमी से सीधे 42 किमी की चुनौती
प्रियंका ने इससे पहले मुख्य रूप से 20 किमी रेस वाक में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई थी। एशियाई खेलों में इस बार उन्होंने पहली बार 42 किमी मैराथन रेस वाक की चुनौती स्वीकार की। प्रतियोगिता की दूरी दोगुनी से भी अधिक होने के साथ तकनीक, गति, मानसिक एकाग्रता और ऊर्जा प्रबंधन की नई चुनौती थी।
एशियाई खेलों से पहले प्रियंका ने बताया था कि 42 किमी की स्पर्धा में करीब साढ़े तीन घंटे तक तकनीक और एकाग्रता बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी। उन्होंने अपनी तैयारी में मेडिटेशन को भी शामिल किया था। उनका लक्ष्य चीन और जापान की शीर्ष खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा करते हुए एशियाई खेलों का पदक हासिल करना था।
टोक्यो में भी झेली थी तकनीकी परेशानी
तकनीकी नियमों से जुड़ी परेशानी प्रियंका के लिए नई नहीं है। 2025 विश्व चैंपियनशिप में भी उन्हें तीन रेड कार्ड मिले थे। हालांकि वहां वे अयोग्य नहीं हुई थीं और उन्हें 3 मिनट 30 सेकेंड का पेनल्टी समय पूरा करना पड़ा था। इस बार चौथे रेड कार्ड ने उन्हें प्रतियोगिता से बाहर कर दिया।
प्रियंका का खेल सफर मेरठ से शुरू हुआ। उन्होंने शुरुआत में जिम्नास्टिक की, लेकिन एक जिला स्तरीय प्रतियोगिता में रेस वाक में हिस्सा लेने के बाद इस खेल को अपना लिया। उस प्रतियोगिता में रेस जीतने पर मिलने वाले बैग के लिए उन्होंने भाग लिया था। तीसरे स्थान पर आने के बाद उनके कोच गौरव त्यागी ने उनकी तकनीक को पहचाना और उन्हें रेस वाक जारी रखने की सलाह दी। यही शुरुआत आगे चलकर उन्हें ओलंपिक तक ले गई।
कामनवेल्थ में रचा था इतिहास
प्रियंका 2022 बर्मिंघम कामनवेल्थ गेम्स में रेस वाक में रजत पदक जीतकर इतिहास रच चुकी हैं। वह कामनवेल्थ गेम्स में रेस वाक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं। 2023 एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी उन्होंने 20 किमी रेस वाक में रजत पदक जीता था। वह टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
इस बार 42 किमी की नई चुनौती में उनका सफर पदक तक नहीं पहुंच सका। नौ किलोमीटर पर चार रेड कार्ड के साथ प्रतियोगिता से बाहर होना उनके अभियान का अप्रत्याशित अंत रहा।
