जो सैनिक सीमा-रेखा पर ध्रुव तारा बन जाता है, उस कुर्बानी के दीपक से सूरज भी शरमाता है; सेना दिवस पर बलिदानियों को किया नमन
Meerut News : मेरठ में 68वें सेना दिवस पर पाइन वार मेमोरियल में बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर ...और पढ़ें

पाइन वार मेमोरियल पर वीर बलिदानियों को सलामी देते वरिष्ठ सैन्य अधिकारी।
HighLights
मेरठ में पाइन वार मेमोरियल में बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने 68वें सेना दिवस पर किया नमन।
जागरण संवाददाता, मेरठ। देश प्रसिद्ध वीर रस के कवि डा. हरिओम पवार की पंक्तियों, 'जो सैनिक सीमा रेखा पर ध्रुव तारा बन जाता है, उस कुर्बानी के दीपक से सूरज भी शरमाता है। गर्म दहानों पर तोपों के जो सीने अड़ जाते हैं, उनकी गाथा लिखने को अंबर छोटे पड़ जाते हैं। शहीदों के चित्र मंदिर की मूर्ति जैसे हो जाते हैं, सैनिक का देह दर्शन तीर्थ समान बन जाता है,' से सेना ने बलिदानियों को नमन किया।

68वें दिवस के पावन अवसर पर पाइन डिवीजन स्थित पाइन वार मेमोरियल पर भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्पगुच्छ अर्पित कर देश के लिए बलिदान देने वाले वीर बलिदानियों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर छावनी क्षेत्र के तीन मेजर जनरल सहित विभिन्न कमांडरों एवं बटालियनों के कमान अधिकारियों ने बलिदानियों को नमन किया।
पाइन वार मेमोरियल का निर्माण विभिन्न युद्धों एवं सैन्य अभियानों में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों की स्मृति में किया गया है। इस स्मारक पर उन सभी बलिदानी सैनिकों के नाम अंकित हैं, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राण न्यौछावर किए।

कार्यक्रम में पश्चिमी उत्तर प्रदेश सब एरिया के जनरल आफिसर कमांडिंग (जीओसी) मेजर जनरल सुमित राणा, पाइन डिवीजन के जीओसी मेजर जनरल प्रणय डंगवाल और चार्जिंग रैम रैपिड स्ट्राइक डिवीजन के जीओसी मेजर जनरल संदीप पुरी ने शिरकत कर बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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वक्ताओं ने कहा कि हर वर्ष 15 जनवरी को मनाया जाने वाला सेना दिवस भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है। इसी दिन वर्ष 1949 में स्वतंत्र भारत के पहले सेनाध्यक्ष के रूप में जनरल केएम करिअप्पा ने पदभार ग्रहण किया था, तभी से यह दिन सैनिक दिवस के रूप में मनाया जाता है। आज भारतीय सेना तकनीकी दक्षता, आधुनिक हथियार प्रणालियों और डिजिटल नेटवर्किंग के क्षेत्र में निरंतर सशक्त हो रही है।
कहा कि भारतीय सेना केवल एक सशस्त्र बल नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, अस्मिता और संप्रभुता की रक्षक है। एक सैनिक का जीवन कठिनाइयों से भरा होता है, लेकिन उसका साहस, अनुशासन और उच्च मनोबल उसे अद्वितीय बनाता है। भारतीय सेना की सबसे बड़ी शक्ति उसका अनुशासन, एकता और 'सेवा, सम्मान और कर्तव्य' का भाव है। सेना जाति, धर्म या भाषा से ऊपर उठकर केवल तिरंगे को सर्वोपरि मानती है।
यह भी कहा गया कि भारतीय सेना की भूमिका केवल युद्ध तक सीमित नहीं है। प्राकृतिक आपदाओं, राष्ट्रीय संकटों और मानवीय सहायता के समय सबसे पहले देशवासियों की सहायता के लिए हमारे जवान ही आगे आते हैं। यह दिन हमें केवल गौरव करने का अवसर नहीं देता, बल्कि देश के प्रति अपने दायित्वों का भी बोध कराता है। अंत में उपस्थित सभी लोगों ने वीर जवानों और अमर बलिदानियों को नमन किया, जिनके बलिदान के कारण आज हमारा तिरंगा गर्व से लहरा रहा है। सभी ने संकल्प लिया कि वे देश की सुरक्षा, सम्मान और एकता के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहेंगे।
