मेरठ, जेएनएन। परामवीर चक्र एक ऐसा अलंकरण जिसका नाम सुनकर ही रगों में जोश और बलिदान की लहर दौड़ जाती है। यह दुश्मनों के सामने सर्वोच्च शूरवीरता और बलिदान के लिए रणबांकुरों को मिलता है। शुक्रवार को सीसीएसयू में उन सभी 21 परमवीर चक्र विजेताओं को नमन किया गया। समारोह में परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र सिंह यादव ने अपनी वीर गाथा से युवाओं में जोश भर दिया।

18 वीर सपूत जो अब नहीं रहे

अधिकांश स्थितियों में यह सम्मान मरणोपरांत दिया गया है बहुत ही कम ऐसे अवसर आए हैं जिनमें यह सम्मान जीवित रहते हुए किसी मिला। विवि के परमवीर वंदनम कार्यक्रम में सभी 21 परमवीर चक्र विजेताओं की पवित्र शहादत को नमन किया गया।

किताबों में शहादत पढ़ा था कारगिल में प्रत्यक्ष देखा- योगेंद्र यादव

परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र यादव ने कहा कि ताकत संस्कार से आती है।अगर ये संस्कारों की ताकत है तो आप को कोई मिटा नहीं सकता। एक सैनिक अपनी पहचान अपने लहू से बनाता है। 19 साल की आयु में मैं सेना में भर्ती हुआ था। ढ़ाई साल की सेवा में कारगिल की लड़ाई में सबसे घातक टीम में रखा गया। व्यक्ति की पहचान उसके पद और ओहदे से नहीं वरन उसके काम से होती है। द्रास सेक्टर में सीधे पाक से सामना हुआ। भयंकर गोली बारी के बीच पाकिस्तान की रणनीति को अपनी यूनिट को बताया। जिससे भारतीय सेना ने बगैर किसी नुकसान के टाइगर हिल पर कब्जा किया। 16 महीनें ट्रीटमेंट के बाद मैं खड़ा हो पाया। 

Posted By: Taruna Tayal

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस