मेरठ, जेएनएन। Meerut-Delhi Express Compensation Scam मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेस-वे का कार्य मुआवजा घोटाले के कारण लंबे समय तक बाधित रहा। दरअसल घोटाले की जांच के चलते चार गांवों के किसानों को मुआवजा भुगतान पर रोक लगा दी गई थी। जिसके चलते किसानों ने जमीन पर कब्जा नहीं दिया था। समस्या के समाधान के लिए स्थानीय अफसरों ने शासन से दिशा निर्देश मांगे थे। सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए पहले महाधिवक्ता से विधिक राय प्राप्त की। इसके बाद केंद्र से निर्देश लिया। केंद्र के निर्देश पर फिर से महाधिवक्ता की राय ली। इसके बाद प्रत्येक कार्य के लिए निर्देश जारी किया। बैनामों को निरस्‍त कराए जाने के साथ ही अफसरों पर भी कार्रवाई जारी रहेगी।

कोई दूसरा विकल्‍प नहीं

प्रदेश शासन की ओर से अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार द्वारा 19 नवंबर को आदेश जारी किया गया। जिसमें उन्होंने पूरे घटनाक्रम और विधिक राय व केंद्र सरकार के निर्देश का उल्लेख करते हुए साफ लिखा है कि विवाद के चलते परियोजना प्रभावित हो रही है और विलंब के कारण परियोजना की लागत भी बढ़ती जा रही है। लिहाजा परियोजना को समय से पूर्ण कराने के लिए अवशेष अधिग्रहीत भूमि का आर्बिट्रेशन वाद में निर्धारित प्रतिकर का भुगतान करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं हैं। उन्होंने तत्काल किसानों को मुआवजा राशि वितरित करने तथा विवादित भूमि की राशि कोर्ट में जमा कराकर भूमि पर कब्जा लेने का निर्देश दिया। 15 दिन में अवैध कब्जे और निर्माण हटाने का निर्देश दिया। आदेश में साफ लिखा गया है कि यह निर्णय विशेष परिस्थितियों में अपवाद है। इसे नजीर न बनाया जाए।

यह है आदेश

आदेश में साफ है कि धारा 3 डी की अधिसूचना जारी होने के बाद बैनामे कराने संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध प्रचलित अनुशासनिक और आपराधिक कार्रवाई यथावत जारी रहेगी। किसी अधिकारी कर्मचारी के विरुद्ध यदि कार्रवाई नहीं की गई है तो इसे तत्काल पूर्ण किया जाए। धारा 3डी के बाद हुए बैनामों को निरस्त कराया जाए। क्रेता द्वारा प्राप्त किए गए प्रतिकर की वसूली की जाए तथा विधि विरुद्ध प्रक्रिया में शामिल दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। भविष्य में 3डी जारी होने के बाद नया बैनामा न हो सके। यह सुनिश्चित किया जाए। कमिश्नर अनीता सी मेश्राम ने बताया कि शासन के आदेश के तहत ही पूरे मामले का समाधान किया जा रहा है।

आरओबी है निर्माणाधीन

मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेस-वे के लिए परतापुर के पास रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) निर्माणाधीन है। इसके तरफ के पिलर तैयार हो चुके हैं और दूसरी तरफ के पिलर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन वे पिलर जिस किसान की जमीन पर बनने थे, उन्होंने कार्य रुकवा दिया था। दो माह से यहां कार्य रुका हुआ था।

मालिकाना हक को लेकर विवाद

गुरुवार से यहां फिर काम शुरू हो गया। इंजीनियरों ने बताया कि संबंधित किसान का प्रकरण निस्तारित हो गया है। इसी के साथ काशी गांव में खसरा संख्या 834 की जमीन पर किसान और नगर निगम के मालिकाना हक को लेकर विवाद है। रिकार्ड में जमीन चारागाह की है। इस जमीन का पैसा जिला जज के न्यायालय में जमा कराकर जमीन पर कब्जा ले लिया गया है। परतापुर में खसरा संख्या 936 की जमीन में मुख्य मार्ग के किनारे एक ढाबे का भवन बना है। जिसकी पैमाइश होनी थी। यह पैमाइश भी पूरी कर ली गई है।

मिट्टी भराव के काम ने पकड़ी रफ्तार

एक्सप्रेस-वे के बीच कई टुकड़ों पर किसानों के अवरोध की वजह से मिट्टी का भराव नहीं हो पाया था। कुछ समय पहले कुछ टुकड़ों का प्रकरण निस्तारित हुआ था, जिसके बाद भराव किया जा रहा है। यहां काम तेज चल रहा है। मेरठ में अच्छरौंडा व काशी में बाधा वाले टुकड़ों पर भी भराव किया जा रहा है।

प्रदूषण की वजह से नहीं हो रहा निर्माण कार्य

मिट्टी भराव का कार्य भले ही चल रहा है लेकिन एक्सप्रेस-वे के लिए निर्माण संबंधी कार्य नहीं हो रहे हैं। पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण एवं सुधार अभिकरण के आदेश पर पूरे एनसीआर में निर्माण कायरें पर रोक लगी हुई है। 

Posted By: Prem Bhatt

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस